बहुचर्चित किशनपुर हत्याकांड की दोबारा होगी जांच, महिला आयोग ने अपने व्यय पर जांच के दिए निर्देश

महासमुंद। बहुचर्चित किशनपुर हत्याकांड मामले की तीन साल बाद दोबारा जांच होगी. राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच कराने और महिला एवं बाल विकास विभाग के व्यय पर फॅारेंसिक एक्सपर्ट डाॅ. सुनंदा ढेंगे को नियुक्त किया है. आयोग की अधिवक्ता शमीम रहमान और एसडीओपी अपूर्वा सिंह को दो माह के भीतर विस्तृत जांच कर रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है. बता दें कि तीन साल पहले स्वास्थ कर्मी योग माया, पति और दो बच्चों की हत्या कर दी गई थी. हत्या के आरोप में 4 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी. मामले में और भी आरोपी होने के संदेह में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग से शिकायत की गई.

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक आज महासमुन्द जिले में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर जन-सुनवाई करने पहुंची थी. कुल 16 प्रकरण में 13 प्रकरण पर सुनवाई के पूर्व रजामंदी होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया. इसी प्रकार 7 प्रकरणों को भी रजामंदी और सुनवाई योग्य नहीं होने के कारण नस्तीबद्ध किया गया. डाॅ. नायक ने महिलाओं को समझाइश देते हुए कहा कि घरेलू आपसी मनमुटाव का समाधान परिवार के बीच किया जा सकता है. घर के बड़े बुजुर्गों का सम्मान और आपसी सामंजस्य सुखद गृहस्थ के लिए महत्वपूर्ण है.

बसना विकासखंड के ग्राम जगत की पूर्व महिला सरपंच सुलोचना राजहंस ने चार अनावेदक के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना, गांव में किसी से भी बातचीत बंद करने और सामान लेनदेन बंद करने की शिकायत की थी. जिसमें वर्तमान सरपंच सहित तीन अन्य अनावेदकों द्वारा उनके खिलाफ गांव के लोगों से चर्चा, भेदभाव करने और सामग्री लेनदेन पर प्रतिबंध लगाया गया है. इस पर अनावेदकों ने बताया कि उनके खिलाफ इस तरह का कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. भविष्य में भी इस तरह की कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जाएगा. उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि पूर्व महिला सरपंच के हुक्का पानी बंद नहीं किया गया है. उनके साथ गांव के सभी लोग बातचीत करेंगे. इस प्रकरण को महिला आयोग द्वारा समझाइश दी गई की भविष्य में अनावेदको द्वारा आवेदक के खिलाफ किसी भी तरह की प्रताड़ना की जाती है, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.

इसी तरह पिथौरा के आवेदिका ने पटवारी पुत्र को मानसिक प्रताड़ना और भरण पोषण की राशि दिलाने की मांग की. जिस पर आयोग ने अनावेदक को आपसी रजामंदी से प्रत्यके माह की पहली तारीख को 8 हजार रूपए आवेदिका के खातें आरटीजीएस के माध्यम से जमा करने और स्वयं अपने विभाग में आवेदन देकर लिखित सहमति प्रस्तुत करने के निर्देश दिए. इसके अलावा आवेदिका को अनावेदक के घर पर किसी भी प्रकार की दखल अंदाजी नहीं करने के निर्देश दिए. इस पर दोनों पक्षों ने सहमति जताई.

इसके अलावा पिथौरा के आवेदिका ने अनावेदक के खिलाफ दैहिक शोषण की शिकायत की थी. इस पर अध्यक्ष ने दोनों पक्षों को गंभीरता से सुनने के बाद पति-पत्नि को सुलह के साथ रहने की समझाइश दी. एक अन्य प्रकरण में महिला आवेदक ने दैहिक शोषण का आरोप लगाया. इस पर आयोग ने दोनों पक्षोें की बातों को गम्भीरता पूर्वक सुनकर अनावेदिका को भरण-पोषण के लिए एकमुश्त एक लाख 60 हजार रूपए की राशि देने के निर्देश दिए. इस पर आवेदक एवं अनावेदिका पक्ष ने आयोग के समक्ष आपसी रजामंदी में तलाक लेने की बात भी स्वीकार की.

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