Mahashivratri 2026 : कल है महाशिवरात्रि यानी शिव और पार्वती के विवाह का दिन. इस दिन की तैयारियां बहुत ही जोड़ शोर से घरों में चल रही है. लोगों ने व्रत की तैयारी, पूजा की सामग्री और पूजा स्थल के सजावट का काम शुरू कर दिया है. महाशिवरात्रि की सजावट में सादगी, पवित्रता और प्राकृतिक तत्वों का विशेष महत्व होता है. यह केवल सुंदरता नहीं, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति भाव से भी जुड़ा होता है. आज हम आपको मंदिर के सजावट से संबंधी कुछ महत्वपूर्ण बातें बतायेंगे, जिनका ध्यान रखकर आप अपने घर के मंदिर को और भी दिव्य बना सकते हैं.

प्राकृतिक सजावट को प्राथमिकता दें
बेलपत्र, धतूरा और गेंदे के फूल भगवान Shiva को अत्यंत प्रिय हैं. प्लास्टिक या कृत्रिम फूलों से बचें. ताजे फूलों की खुशबू वातावरण को शुद्ध और सकारात्मक बनाती है.
हल्की और शांत लाइटिंग
बहुत तेज या चकाचौंध वाली लाइट से बचें. दीये या हल्की पीली रोशनी आध्यात्मिक वातावरण बनाती है. मोमबत्तियों या घी के दीपक का उपयोग शुभ माना जाता है.
पारंपरिक रंगों का चयन
सफेद, पीला, केसरिया और हल्का हरा रंग शुभ माने जाते हैं. रंगोली में भी प्राकृतिक रंगों या फूलों का प्रयोग करें.
किन चीजों से बचें
- भारी और बड़े सजावटी सामान से मंदिर को न भरें.
- बहुत अधिक कृत्रिम सजावट मंदिर की सादगी को कम कर सकती है.
- टूटी या मुरझाई हुई वस्तुएं तुरंत हटा दें.
स्वच्छता और व्यवस्था
सजावट से पहले मंदिर की अच्छी तरह सफाई करें. पूजा की सामग्री व्यवस्थित और सीमित रखें.
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