Mahavir Jayanti 2026 : आज पूरा देश भगवान महावीर की 2625वीं जयंती बना रहा है. जैन समाज द्वारा कई स्थानों पर विशेष आयोजन और धार्मिक उत्सव देखने को मिल रहे हैं. श्रद्धालुओं जन्मोत्सव का लंबे समय से इंतजार था. जगह-जगह रथ यात्राएं निकाली जा रही हैं. चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्म हुआ था. इसी पावन दिन को महावीर जयंती के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है.

भगवान महावीर ने अहिंसा, सत्य, करुणा और आत्मसंयम का संदेश दिया. उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को जीवन में शांति, संतुलन और सही मार्ग अपनाने की प्रेरणा देती हैं. इस दिन श्रद्धालु एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं. उनके उपदेशों को अपनाने का संकल्प लेते हैं.

भगवान महावीर के प्रमुख विचार

अहिंसा को उन्होंने जीवन का सबसे बड़ा धर्म बताया. यह केवल किसी को शारीरिक कष्ट न देने तक सीमित नहीं है, बल्कि मन और वचन से भी किसी को आहत न करना ही सच्ची अहिंसा है. हर जीव के प्रति दया और सम्मान रखने से ही समाज में संतुलन बना रह सकता है.

जियो और जीने दो

महावीर ने जियो और जीने दो का संदेश दिया. उनका मानना था कि घृणा और द्वेष से केवल विनाश होता है, जबकि प्रेम और करुणा से ही जीवन आगे बढ़ता है. उन्होंने सत्य को जीवन का आधार माना और कहा कि सत्य का मार्ग अपनाने वाला व्यक्ति ही सही दिशा में आगे बढ़ता है.

क्रोध को उन्होंने सबसे बड़ा शत्रु बताया. उनके अनुसार, क्रोध पहले स्वयं को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए इसे शांति और क्षमा से जीतना ही बेहतर है. महावीर जयंती के अवसर पर उनके ये विचार आज भी लोगों को बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं. समाज में सकारात्मक बदलाव का संदेश देते हैं.