दिल्ली पुलिस(Delhi Police) ने अपनी आंतरिक व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पुलिस मुख्यालय ने संवेदनशील पदों पर लंबे समय तक एक ही अधिकारी या कर्मी की तैनाती पर रोक लगाने के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना, निष्पक्ष कार्यप्रणाली सुनिश्चित करना और किसी भी प्रकार की मनमानी या हितों के टकराव की संभावनाओं को खत्म करना है। माना जा रहा है कि इस कदम से जवाबदेही बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

दिल्ली पुलिस ने थानों और विभिन्न यूनिट्स में सबसे अधिक संवेदनशील माने जाने वाले पदों के लिए अब निश्चित समयसीमा तय कर दी है। नए दिशा-निर्देशों के अनुसार चिट्ठा मुंशी, ड्यूटी ऑफिसर, ट्रैफिक डिविजन तथा बटालियन में ड्यूटी रोस्टर तैयार करने जैसे अहम पदों पर किसी भी पुलिसकर्मी को एक वर्ष से अधिक समय तक तैनात नहीं किया जाएगा। निर्धारित अवधि पूरी होते ही संबंधित स्टाफ को अनिवार्य रूप से फील्ड ड्यूटी में भेजा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य एक ही स्थान पर लंबे समय तक बने प्रभाव को रोकना और कार्यप्रणाली में निष्पक्षता बनाए रखना है।

चिट्ठा मुंशी की नियुक्ति पर भी तय हुए मानक

पुलिस स्टेशनों में ड्यूटी रोस्टर तैयार करने वाले चिट्ठा मुंशी की नियुक्ति को लेकर भी अब स्पष्ट और सख्त नियम तय कर दिए गए हैं। पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी स्टैंडिंग ऑर्डर के अनुसार इस जिम्मेदारी के लिए केवल हेड कॉन्स्टेबल, सहायक उपनिरीक्षक (ASI) या पदोन्नति के बाद बने सब-इंस्पेक्टर रैंक के कर्मियों की ही नियुक्ति की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे अनुभवी स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित होगी और जवाबदेही की व्यवस्था और मजबूत होगी।

कार्यकाल पूरा होते ही बदलेगी जगह

चिट्ठा मुंशी के रूप में निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद संबंधित पुलिसकर्मी को उसी थाने या सब-डिविजन क्षेत्र में दोबारा तैनात नहीं किया जाएगा। ऐसे कर्मियों को कार्यालयीन जिम्मेदारियों से हटाकर अनिवार्य रूप से फील्ड ड्यूटी में भेजा जाएगा। यही व्यवस्था मिनिस्ट्रियल स्टाफ, जनरल स्टोर इंचार्ज, खरीद से जुड़े कर्मियों और पोस्टिंग-ट्रांसफर से संबंधित कार्य देखने वाले कर्मचारियों पर भी लागू होगी। इन सभी संवेदनशील पदों पर हर दो वर्ष में रोटेशन अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि किसी एक स्थान या जिम्मेदारी पर लंबे समय तक प्रभाव बनाए रखने की संभावना समाप्त की जा सके।

एक जैसी पोस्टिंग से पहले 5 साल का गैप

यदि किसी पुलिसकर्मी को किसी अन्य जिले या यूनिट में समान प्रकृति की जिम्मेदारी सौंपी जानी हो, तो उसके लिए कम से कम पाँच वर्ष का अंतर अनिवार्य होगा। अधिकारियों के अनुसार यह निर्णय गहन मंथन के बाद लिया गया है, ताकि किसी एक तरह की जिम्मेदारी या स्थान पर लंबे समय तक बने प्रभाव और दबदबे की संभावना को रोका जा सके तथा प्रशासनिक निष्पक्षता बनी रहे।

DCP करेंगे सख्त निगरानी

इन आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए उनकी नियमित समीक्षा की जाएगी। सभी जिलों और यूनिट्स के पुलिस उपायुक्तों (DCP) को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने दौरों के दौरान थानों, पुलिस लाइंस और ट्रैफिक सर्कल में रोटेशन नियमों के पालन की जांच करें। किसी भी स्तर पर लापरवाही या उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

रिटायरमेंट से पहले पसंदीदा पोस्टिंग का विकल्प

सेवा के अंतिम चरण में पहुंचे पुलिसकर्मियों को भी नए दिशा-निर्देशों के तहत राहत दी गई है। नियमों के अनुसार रिटायरमेंट से दो वर्ष पहले किसी भी पुलिसकर्मी का जनरल ट्रांसफर नहीं किया जाएगा। वहीं 58 वर्ष की आयु पूरी कर चुके इच्छुक कर्मियों को टर्मिनल पोस्टिंग के लिए तीन विकल्प देने का अवसर मिलेगा। इन विकल्पों पर निर्णय संबंधित विभाग में उपलब्ध रिक्त पदों, योग्यता, कौशल और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए पुलिस स्थापना बोर्ड (PEB) द्वारा लिया जाएगा।

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