Dharm Desk :- पितृपक्ष में आने वाला मंगलवार इस बार खास संयोग लेकर आ रहा है। 29 सितंबर को मंगलवार के दिन महाभरणी श्राद्ध रहेगा। पंचांग के अनुसार इस दिन तृतीया श्राद्ध भी है। ऐसे में पितरों का स्मरण करने के साथ बजरंगबलीकी पूजा भी की जा सकती है। इस दिन कौन से 4 काम किए जा सकते हैं, आइए जानते है ।
हनुमान चालीसा का पाठ करें
मंगलवार को स्नान आदि से निवृत्त होकर हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। श्रद्धा के अनुसार एक, तीन, पांच या सात बार पाठ किया जा सकता है। पितृपक्ष में हनुमानजी का स्मरण करने से मन को शांति मिलती है। और भक्त बजरंगबली का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं।

बंदरों को गुड़-चना खिलाएं
मंगलवार को बंदरों को गुड़ और चना खिलाने की परंपरा भी बताई गई है । यदि आस-पास बंदर उपलब्ध हों तो उन्हें भोजन कराया जा सकता है। इस दौरान स्वच्छता और सुरक्षित तरीके का ध्यान रखें। इसे हनुमानजी की सेवा से जोड़कर देखा जाता है।
हनुमानजी को चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाएं
मंगलवार को हनुमान मंदिर में जाकर बजरंगबली को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित किया जा सकता है। इसके साथ हनुमान जी के सामने दीपक जलाकर अपनी मनोकामना रखें। धार्मिक मान्यताओं में सिंदूर और चमेली के तेल का अर्पण हनुमान पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
पितरों के नाम से दान करें
पितृपक्ष में जरूरत मंद व्यक्ति को अन्न, तिल, उड़द की दाल, गुड़ या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य सामग्री का दान करें। पितरों का स्मरण करके किया गया दान इस दिन की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। मंगलवार होने के कारण गुड़ आदि का दान हनुमानजी की पूजा से भी जोड़ा जाता है।
महाभरणी श्राद्ध का विशेष संयोग
29 सितंबर को महाभरणी श्राद्ध रहेगा। पंचांग गणना के अनुसार, इस दिन भरणी नक्षत्र सुबह करीब 9:03 बजे से शुरू होकर 30 सितंबर सुबह 7:36 बजे तक रहेगा। श्राद्ध के लिए कुतुप और अपराह्न काल को महत्वपूर्ण होगा। इस दिन अपने पितरों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें और यदि परिवार में किसी पितर की निर्धारित तिथि हो तो उसी के अनुसार श्राद्ध-विधि करें। साथ ही मंगलवार के दिन हनुमानजी की पूजा करके पितरों और बजरंग बली दोनों का स्मरण किया जा सकता है ।
भरणी नक्षत्र का यमराज से क्या संबंध है
महाभरणी को खास मानने की सबसे बड़ी वहज भरणी नक्षत्र के देवता यम माने जाते हैं। यम को धर्मराज और मृत्यु के देवता के रूप में पूजा जाता है। दूसरी तरफ पितृपक्ष भी दिवंगत पूर्वजों की स्मृति, तर्पण और श्राद्ध के लिए निर्धारित समय है। इसी कारण पितृ पक्ष और यम से संबंधित भरणी नक्षत्र का संयोग धार्मिक दृष्टि से विशेष है । यही कारण है कि महाभरणी के दिन पूर्वजों के निमित्त पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध करने की परंपरा चली आ रही है।


