पवन राय, मंडला। कुदरत के अपने कुछ ऐसे रहस्य हैं, जो आज भी लोगों को हैरान कर देते हैं। मंडला के खुकसर गांव में हर साल जून के महीने में विदेशी मेहमानों की तरह पहुंचने वाले एशियन ओपनबिल पक्षी अब विदाई की तैयारी में हैं। इन पक्षियों के आने के साथ बारिश की शुरुआत और अक्टूबर में इनकी वापसी का सिलसिला वर्षों से देखा जा रहा है। खास बात यह है कि पेड़ों पर बनाए गए इनके घोंसले इतने मजबूत होते हैं कि तेज आंधी और तूफान के बीच भी टिके रहते हैं। आखिर क्या है इन पक्षियों के मंडला पहुंचने की वजह, और कैसे तय होता है इनका आने-जाने का समय?

मंडला के खुकसर गांव में इन दिनों प्रकृति का एक खूबसूरत नजारा देखने को मिल रहा है। पेड़ों पर बने घोंसले और उनमें चहचहाते एशियन ओपनबिल पक्षी अब धीरे-धीरे अपने अगले सफर की तैयारी में हैं हर साल जून के महीने में यहां पहुंचने वाले ये पक्षी अपने लिए सुरक्षित ठिकाना चुनते हैं। अनुकूल वातावरण, पर्याप्त भोजन और प्रजनन के लिए उपयुक्त परिस्थितियां इन्हें इस इलाके की ओर आकर्षित करती हैं। नदी, जलस्रोत और आसपास की हरियाली इनके प्रवास को अनुकूल बनाते हैं।

इन पक्षियों की सबसे खास बात है इनके घोंसले। पेड़ों की ऊंची डालियों पर बड़ी संख्या में बनाए गए घोंसले तेज हवा और खराब मौसम के बीच भी टिके रहते हैं। यही वजह है कि खुकसर गांव में इनका बसेरा लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है स्थानीय ग्रामीण इन पक्षियों के आगमन को बारिश और खुशहाली से जोड़कर देखते हैं। मान्यता है कि इनके पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद बारिश शुरू हो जाती है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से इनके आगमन का संबंध प्रवास, भोजन और प्रजनन जैसी प्राकृतिक परिस्थितियों से है।

पक्षियों के इस अनोखे संसार को लंबे समय से करीब से देख रहे पक्षी विशेषज्ञ राजीव मिश्रा बताते हैं कि एशियन ओपनबिल का मंडला पहुंचना एक नियमित मौसमी सिलसिला है। वर्ष 2006 से वे इन पक्षियों को निश्चित स्थानों और पेड़ों पर देखते आ रहे हैं। जून में इनके आगमन के बाद बारिश शुरू होने और इनके घोंसले बनाने की गतिविधियां भी देखने को मिलती हैं।

अब अक्टूबर का महीना है और मौसम में बदलाव के साथ इन प्रवासी पक्षियों की वापसी का समय भी करीब आ गया है। जिन पेड़ों पर महीनों तक इनकी चहचहाहट गूंजती रही, वे जल्द ही इनके बिना सूने नजर आ सकते हैं हजारों किलोमीटर की यात्रा करने वाले ये परिंदे हर साल मंडला की धरती पर आकर प्रकृति और वन्यजीवों के अनूठे रिश्ते की कहानी बयां करते हैं। इनका आगमन जहां गांव की खूबसूरती बढ़ाता है, वहीं इनके सुरक्षित आवास और पर्यावरण संरक्षण की अहमियत भी याद दिलाता है।

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