चंडीगढ़। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि किसी बालिग जोड़े के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से केवल इसलिए इनकार नहीं किया जा सकता कि वे लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। जस्टिस मनदीप पन्नू ने फैसले में कहा कि जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार सर्वोच्च है। इसे हर हाल में संरक्षित किया जाना चाहिए.
हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी को निर्देश दिया कि 16 फरवरी को दिए गए मांग पत्र पर विचार करें। याचिकाकर्ताओं के सामने मौजूद खतरे का आकलन करें और जरूरी कदम उठाएं। सुनिश्चित करें कि किसी प्रकार की हानि न हो। कोर्ट मोहाली के एक बालिग लिव-इन जोड़े की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं ने अपने परिजनों से जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही याचिकाकर्ता लिव-इन में हों, उनके जीवन और स्वतंत्रता की सुरक्षा सर्वोच्च है। वे संरक्षण के हकदार हैं। कोर्ट ने 2014 के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार इतना पवित्र है कि वैध विवाह के अभाव में भी इसकी रक्षा की जानी चाहिए। संवैधानिक अदालतें उन जोड़ों को भी सुरक्षा देती हैं, जिन्होंने परिवार की इच्छा के विरुद्ध विवाह किया हो।

क्या सुरक्षा के लिए शादी जरूरी है….
सुरक्षा हासिल करने के लिए क्या शादी जरूरी है? हाईकोर्ट ने इस सवाल पर अपने ही दो पुराने फैसलों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार हर व्यक्ति को प्राप्त है। किसी को अपने साथी का चयन करने, विवाह करने या बिना विवाह के साथ रहने का विकल्प चुनने का भी अधिकार है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि लिव-इन संबंध पश्चिमी देशों से समाज में आए और शुरुआत में महानगरों तक सीमित रहे। कानून में ऐसे संबंधों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और यह कोई अपराध नहीं है इसलिए ऐसे व्यक्तियों को भी अन्य नागरिकों की तरह समान कानूनी संरक्षण मिलना चाहिए।
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