किशनगंज। जिले के ठाकुरगंज प्रखंड के तत्कालीन अंचल अधिकारी (सीओ) ओम प्रकाश भगत के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त दंडात्मक कार्रवाई की है। गलत जाति प्रमाण पत्र जारी करने के गंभीर मामले में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने तत्कालीन सीओ की दो वेतनवृद्धियों को संचयी प्रभाव से रोकने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) दर्ज करने का भी स्पष्ट आदेश दिया गया है। इस कार्रवाई से पूरे महकमे में हड़कंप मच गया है।

​विवाद की शुरुआत

​यह पूरा विवाद जेबा बख्तियार को पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाने से जुड़ा हुआ है। नियमों के अनुसार वे शेख जाति से संबंधित थीं, इसके बावजूद उन्हें त्रुटिपूर्ण तरीके से पिछड़ा वर्ग का प्रमाण पत्र दे दिया गया था। इसी फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर उन्होंने बिहार पंचायती राज अधिनियम, 2006 की धारा 135 के परंतुक के नियमों को दरकिनार करते हुए ठाकुरगंज से आरक्षित मुखिया पद पर चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
​जेबा बख्तियार का मायका ठाकुरगंज प्रखंड की पटेशरी पंचायत के मालानी गांव में है और उनकी ससुराल दिघलबैंक प्रखंड के जागीर पदमपुर में है। वर्ष 2021 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान नामांकन के समय उन्होंने इसी विवादित जाति प्रमाण पत्र का उपयोग किया था।

​जांच के बाद मुखिया की कुर्सी की गई थी बर्खास्त

​त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान ही जेबा बख्तियार की प्रतिद्वंद्वी द्वारा उनके जाति प्रमाण पत्र की वैधता पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बाद मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू हुई। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से पुष्टि हुई कि जारी किया गया प्रमाण पत्र पूरी तरह नियमों के विरुद्ध और गलत था।
​सभी प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद, वर्ष 2024 में जेबा बख्तियार को उनके मुखिया पद से बर्खास्त कर दिया गया था। अब इस मामले में भ्रष्टाचार और लापरवाही के खिलाफ प्रशासन ने और अधिक सख्ती दिखाते हुए तत्कालीन सीओ के अलावा इस पूरी प्रक्रिया में संलिप्त रहे संबंधित राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज करने और आरोप निर्धारित करने का आदेश दिया है।