बसपा प्रमुख मायावती ने सोमवार को ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग दोहराई. उन्होंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर भी कई आरोप लगाए और दलित युवाओं से उनके बहकावे में नहीं आने की अपील की.
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने सोमवार को ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की अपनी पुरानी मांग दोहराई. लखनऊ में जारी बयान में उन्होंने कहा कि मतदाता को यह भरोसा होना चाहिए कि उसका वोट उसी उम्मीदवार के पक्ष में दर्ज और गिना गया है, जिसे उसने मतदान किया है.
मायावती ने संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव कराने और उसकी प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग की है. उनका कहना है कि मतदाता के मन में अपने वोट को लेकर किसी तरह का संदेह नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है.
ईवीएम पर पुराने सवाल
मायावती ने कहा कि देश में लंबे समय तक चुनावों में बैलेट पेपर का इस्तेमाल होता रहा और मतगणना के दौरान सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में मतपत्रों की गिनती की जाती थी. उनके मुताबिक बाद में निर्वाचन प्रक्रिया में ईवीएम का इस्तेमाल शुरू हुआ.
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा ने भी ईवीएम को लेकर सवाल उठाए थे. मायावती के अनुसार उस समय भाजपा की ओर से ईवीएम की इलेक्ट्रॉनिक चिप में छेड़छाड़ की आशंका जताई गई थी और इसके खिलाफ सामग्री भी प्रकाशित की गई थी.
मायावती ने कहा कि सत्ता में आने के बाद भाजपा ने ईवीएम की व्यवस्था को खत्म नहीं किया और मतदान तथा मतगणना में इसका इस्तेमाल जारी रखा. बसपा प्रमुख का कहना है कि उनकी पार्टी शुरुआत से ही ईवीएम के जरिए मतदान का विरोध करती रही है.
चंद्रशेखर पर आरोप
मायावती ने आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी आरोप लगाए. उन्होंने दावा किया कि नगीना में चंद्रशेखर का कोई जनाधार नहीं था और भाजपा ने बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए ईवीएम में धांधली कर उन्हें चुनाव जिताया.
हालांकि, निर्वाचन आयोग के आधिकारिक 2024 लोकसभा परिणाम के अनुसार नगीना सीट से चंद्रशेखर आजाद को 5,12,552 वोट मिले थे और उन्होंने भाजपा के ओम कुमार को 1,51,473 वोटों के अंतर से हराया था. मायावती द्वारा लगाए गए ईवीएम में धांधली के आरोप का यह आधिकारिक परिणाम अपने आप में प्रमाण नहीं है.
मायावती ने आरोप लगाया कि चंद्रशेखर आजाद दलितों से जुड़े मामलों में धरना-प्रदर्शन के लिए युवाओं को आगे करते हैं और इसके बाद उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हो जाते हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों के चलते युवाओं को सरकारी नौकरी मिलने में दिक्कत हो सकती है और उन्हें लंबे समय तक अदालत के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं.
एसआईआर पर भी सवाल
मायावती ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े एसआईआर और अन्य मुद्दों को लेकर फैली कथित भ्रांतियों पर भी निर्वाचन आयोग से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की. उन्होंने कहा कि चुनाव से जुड़े मामलों में समय रहते लोगों की शंकाएं दूर की जानी चाहिए.
बसपा प्रमुख ने कहा कि उनकी पार्टी निष्पक्ष चुनाव में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए ईवीएम का इस्तेमाल बंद करने और बैलेट पेपर से मतदान की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग करती रही है. उन्होंने दलित युवाओं से चंद्रशेखर आजाद के बहकावे में नहीं आने की अपील भी की.


