हेमंत शर्मा, इंदौर। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने का सपना एक बार फिर टूट गया है। झाबुआ में मेडिकल कॉलेज बनाने का प्रोजेक्ट वित्तीय संसाधनों की कमी के चलते बंद कर दिया गया है। करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट के लिए विश्वविद्यालय 20 करोड़ रुपये की प्राथमिक राशि भी नहीं जुटा सका। इसके साथ ही DAVV में मेडिकल कॉलेज शुरू करने की कोशिश पिछले 23 सालों (2001 से अब तक) में आठवीं बार नाकाम साबित हुई है।

दो साल पहले शुरू हुई थी प्रक्रिया

करीब दो साल पहले झाबुआ में मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके लिए राजीव गांधी प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी (RGPV) के दायरे में आने वाले इंजीनियरिंग कॉलेज के भवन का चयन किया गया था। शासकीय अस्पताल के साथ अनुबंध (MoU) और कंसल्टेंट नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी, लेकिन फंड की कमी के चलते अब मेडिकल कॉलेज से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह रोक दिया गया है।

99 करोड़ के प्रोजेक्ट्स भी अधूरे

यूनिवर्सिटी प्रशासन की यह नाकामी केवल मेडिकल कॉलेज तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में स्वीकृत कई नए भवनों और विकास कार्यों के प्रस्ताव भी ठप पड़े हैं। दावा किया जा रहा है कि 99 करोड़ रुपये के विभिन्न प्रोजेक्ट्स में से एक भी पूरा नहीं हो सका है। आलम यह है कि कुलसचिव और कुलपति आवास के निर्माण का काम भी पिछले करीब 10 सालों से लंबित पड़ा हुआ है।

प्रदेश के 9 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों का संचालन करेगी सरकार

एक तरफ जहां DAVV का प्रोजेक्ट अटका है, वहीं मध्य प्रदेश सरकार राज्य के 9 नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों का संचालन खुद करने जा रही है। बुधनी, छतरपुर, उज्जैन और दमोह में मेडिकल कॉलेजों की इमारतें बनकर तैयार हो चुकी हैं। मंडला और राजगढ़ में मेडिकल कॉलेज भवनों का निर्माण कार्य जारी है। नीमच और सिंगरौली के मेडिकल कॉलेज केंद्र सरकार की योजना के तहत संचालित किए जाएंगे।

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