मेरठ के परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में फर्जी एंटी करप्शन अधिकारी बनकर छिंदा सिंह का अपहरण करने और 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से कार, पांच मोबाइल फोन, दो फर्जी पहचान पत्र और एक वॉकी-टॉकी बरामद किया है.

मेरठ. परीक्षितगढ़ थाना क्षेत्र में फर्जी एंटी करप्शन अधिकारी बनकर एक युवक का अपहरण करने और उसके परिजनों से 50 लाख रुपये की फिरौती मांगने के मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने कथित तौर पर ऑनलाइन सट्टेबाजी की रकम मिलने की जानकारी के आधार पर कुंडा गांव निवासी छिंदा सिंह को निशाना बनाया था. पुलिस ने वारदात में इस्तेमाल की गई कार समेत कई सामान बरामद किए हैं.

कार में खींचकर किया अपहरण

पीड़ित छिंदा सिंह ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि मंगलवार शाम वह पैदल अपने गांव जा रहा था. इसी दौरान बिना नंबर प्लेट वाली एक कार उसके पास रुकी और उसमें सवार लोगों ने उसे जबरन गाड़ी में बैठा लिया. आरोपियों ने उसका मोबाइल फोन भी छीन लिया.

शिकायत के अनुसार, विरोध करने पर आरोपियों ने खुद को एंटी करप्शन विभाग का अधिकारी बताया. उन्होंने दावा किया कि छिंदा के बैंक खाते में ऑनलाइन सट्टेबाजी के 50 लाख रुपये आए हैं और उससे रकम देने को कहा. ऐसा नहीं करने पर एनकाउंटर कराने और जेल भेजने की धमकी दी गई.

चाचा से मांगी फिरौती

आरोपियों ने कथित तौर पर छिंदा के मोबाइल फोन से उसके चाचा को कॉल कर 50 लाख रुपये की फिरौती मांगी. इसके बाद उन्होंने उसका बैंक खाता भी चेक किया. खाते में पैसे नहीं मिलने पर आरोपियों ने उसके साथ मारपीट की.

पुलिस की नाकेबंदी और पकड़े जाने के डर से आरोपी बुधवार देर रात छिंदा को झब्बापुरी गांव के बाहर सड़क पर छोड़कर फरार हो गए.

सीसीटीवी से मिला सुराग

घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी देहात अभिजीत कुमार के निर्देशन में पुलिस टीम ने जांच शुरू की. पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिनकी मदद से आरोपियों की कार का पता लगाया गया. इसके बाद पुलिस ने घेराबंदी कर झारखंडी मंदिर के पास से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया.

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान झब्बापुरी निवासी मुरसलीन, मोनू और आशीष तथा लूबक्सर निवासी इकबाल और फिरोज के रूप में हुई है.

कार पर लगा था फर्जी बोर्ड

पुलिस ने आरोपियों के पास से घटना में इस्तेमाल की गई कार, पांच मोबाइल फोन, दो फर्जी पहचान पत्र और एक वॉकी-टॉकी बरामद किया है. पुलिस के मुताबिक, लोगों को गुमराह करने के लिए कार पर एंटी करप्शन सोशल वेलफेयर एसोसिएशन की प्लेट लगाई गई थी.

पुलिस पूछताछ में सामने आया कि मुख्य आरोपी मुरसलीन और मोनू को कथित तौर पर जानकारी मिली थी कि छिंदा के पास ऑनलाइन सट्टेबाजी की बड़ी रकम आई है. इसके बाद उन्होंने फर्जी अधिकारी बनकर अपहरण और फिरौती मांगने की योजना बनाई.

पुलिस अब आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच कर रही है, ताकि उनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य संभावित गतिविधियों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके.