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नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल के दामों में कटौती करने के साथ गेहूं की बढ़ती कीमत पर रोक लगाने के बाद अब मोदी सरकार चीनी और खाने के तेल पर नियंत्रण कर रही है. सरकार ने एक तरफ जहां चीनी के निर्यात पर 1 जून से पाबंदी लगा दी है. वहीं सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात पर 2 साल के लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट​​​​​​ सेस खत्म करने का ऐलान किया है.

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक होने के साथ-साथ दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक भी है. ऐसे में भारत में चीनी की बढ़ती कीमतों को देखते हुए केंद्र सरकार ने चीनी के निर्यात पर एक जून से प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार के इस कदम के आभास मात्र से मंगलवार को चीनी शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई. खासकर एक्सपोर्ट करने वाली चीनी कंपनियों के शेयर फिसल गए. रेणुका शुगर के शेयर 6.66%, बलरामपुर चीनी मिल्स के शेयर 5%, धामपुर शुगर के शेयर 5 फीसदी और शक्ति शुगर के शेयर करीब 7 फीसदी गिर गए.

सरकार के इस कदम से भारत में चीनी के दाम में कमी आने के आसार हैं, वहीं दूसरी ओर आयाचित चीनी पर निर्भर दुनिया के दूसरे देशों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा. भारत से सबसे ज्यादा चीनी खरीदने वालों देशों में इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, मलेशिया और अफ्रीकी देश हैं. अगर उत्पादन की बात करें तो उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक की देश में कुल चीनी उत्पादन में करीब 80 फीसदी की हिस्सेदारी है. इसके अलावा गन्ना उत्पादक राज्यों में आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, बिहार, हरियाणा और पंजाब भी शामिल हैं.

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बात करें खाने के तेल की तो इसके दाम भी सरकार ने 20 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल के आयात पर 2 साल के लिए कस्टम ड्यूटी और एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट​​​​​​ सेस खत्म करने का ऐलान किया है. यह सेस अभी 5% है. तेलों के आयात पर दी गई छूट 31 मार्च 2024 तक लागू रहेगी. फैसले से खाने का तेल सस्ता होने की उम्मीद है. महंगाई में खाद्य तेल की प्रमुख भागीदारी है और पिछले तीन महीनों से खाद्य तेल के खुदरा दाम में 15 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

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