नई दिल्ली- छत्तीसगढ़ के सुदूर इलाके जोकापाट में बिजली पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विट कर खुशी जाहिर की है. मोदी ने अपने ट्विट में लिखा है कि- ऐसी खबर मुझे बेहद खुशी देती है और भावुक करती है. यह देखना बेहद सुखद है कि इतने लोगों के जीवन में रोशनी आ गई.

आजादी के 70 साल बाद भी बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के जोकापाट में बिजली नहीं थी. जंगलों और पहाड़ों से घिरे जोकापाट गांव में अब जाकर बिजली पहुंची है. सूबे के मुखिया डाॅ.रमन सिंह ने हाल ही में बिजली तिहार मनाया है. प्रदेश के सुदूर इलाकों में जाकर अंधेरे में जी रही जिंदगियों को रोशनी से रूबरू कराया है. जोकापाट भी इनमें से ही एक ऐसा गांव था.

जोकापाट की अंधेरे से लड़ाई नई बात नहीं थी. दस साल पहले इस गांव ने नक्सलवाद का दंश झेला था. लेकिन हालात तेजी से बदलते गए. लोक सुराज अभियान के दौरान मुख्यमंत्री डाॅ. रमन सिंह भी जोकापाट पहुंचे थे. स्थानीय ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्याओं की फेहरिस्त गिनाई थी. रमन सरकार के प्रयासों का असर रहा और आज पूरे गांव की तकदीर और तस्वीर बदल गई है. शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं से यह गांव आज आबाद हैं. पहाड़ पर बसे होने के कारण आज से कुछ साल पहले इस गांव तक पहुंचना कठिन था, लेकिन पिछले साल यह गांव प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से पक्की सड़क से जुड़ गया है.

 

पिछले साल दुर्गापुर से भरतपुर मुख्य सड़क से इस गांव तक जाने के लिए 15 किलोमीटर की पक्की सड़क बन गयी है. जोकापाठ ग्राम पंचायत है और जामपानी इसका आश्रित ग्राम. इस पूरे ग्राम पंचायत  में 541 परिवार हैं, जिसमें 221 परिवार पहाड़ी कोरवाओं की है। जोकापाट में पांच प्रायमरी स्कूल, तीन मिडिल  स्कूल और एक हाईस्कूल खुल गया है। यहां 50-50 सीटर के दो छात्रावास हैं, इसमें एक हॉस्टल पहाड़ी कोरवाओं के लिए है। यहां एक उपस्वास्थ्य केन्द्र भी है, गांव की गर्भवती माताओं की डिलीवरी यहीं होती है। एएनएम इसी केन्द्र में रहती है, जिससे छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज सहज हो जाता है। पीने के पानी की  भी अच्छी व्यवस्था है। लगभग 541 परिवारों के बीच 28 हैण्डपम्प हैं और गांव के पूरे घर सौर उर्जा से जगमग है। यही नहीं यह गांव खुले में शौचमुक्त (ओडीएफ) भी घोषित हो चुका है।