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एन.के.भटेले, भिंड। मध्यप्रदेश के भिंड जिले के ग्राम पंचायत रायतपुरा की गांव स्टेशन का पुरा बीते कई वर्षों से एक अनजान बीमारी से जूझ रहा है. बीमारी भी ऐसी की गाँव का एक भी घर ऐसा नहीं, जहां एक या दो लोग इसकी चपेट में ना हों. यहां लोगों के कमर के नीचे का हिस्सा ख़ासकर पैरों में टेढ़ापन और विकलांगता की समस्या देखी जा रही है. बड़ी बात यह है कि इस बीमारी के बारे में स्वास्थ्य विभाग भी अब तक कुछ पता नहीं लगा सका है.
दरअसल रायतपुरा पंचायत के स्टेशन का पुरा गाँव में बीमारी का शिकार ग्रामीणों का मानना है कि उनके साथ हो रही समस्या इस क्षेत्र के भूजल यानी पानी की वजह से ही है. गांव के रहने वाले बुजुर्ग केदार सिंह का कहना है कि उनके गाँव में पीने के पानी में कैल्शियम की कमी है. जिसकी वजह से सभी लोग प्रभावित हो रहे हैं. लोगों के पैर टेढ़े हो रहे हैं. कमर टेढ़ी हो रही है. बुजुर्गों को उम्र का लिहाज़ माना जा सकता है, लेकिन 19 साल के बच्चे भी अपंगता की ओर बढ़ रहे हैं. जैसे जैसे उनकी उम्र बढ़ रही है, वैसे ही उनकी हड्डियां कमज़ोर और टेढ़ी होती जा रही है.
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गांव के युवा देवेंद्र भी इसी अनजान बीमारी से पीड़ित हैं. उनके दोनों पैर लगभग टेढ़े होने शुरू हो चुके हैं. दो बार अपने पैरों का ऑपरेशन करा चुका है. बावजूद इस स्थिति में ज़्यादा सुधार नहीं आया है. देवेंद्र बताते हैं कि उनके साथ यह समस्या क़रीब 10 साल पहले शुरू हुई थी, तब वे 15 साल के थे. ग्वालियर में एक डॉक्टर से इलाज कराया, तो उन्होंने बताया कि यह समस्या पानी में कैल्शियम की कमी की वजह से है. जो पानी गाँव के लोग पी रहे हैं, उसमें न ही मिनरल है न ही कैल्शियम.
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इस संबंध में जब PHE विभाग के कार्यपालन यंत्री आर के सिंह से संपर्क किया, तो उन्होंने बताया कि साल 2020 में भी इस तरह की शिकायत सामने आई थी कि पानी की वजह से लोग विकलांग हो रहे है. तब स्टेशन का पुरा गाँव पर आकर विभाग ने पानी के सैंपल लिए थे. लेकिन उनकी जाँच करने पर उसमें किसी तरह की कोई कमी नहीं पाई गई थी. एक बार फिर इस तरह की सूचना मिलने पर टीम अब दोबारा से सैंपल ले चुकी है और जल्द ही उसे टेस्टिंग के लिए भोपाल भी भेजा जा रहा है. जिससे यह स्पष्ट हो सके कि क्या वाक़ई उस पानी में किसी तरह की कमी है या लोग किसी अन्य वजह से ही बीमार हो रहे हैं.
ऐसा नहीं है कि इस समस्या से स्वास्थ्य विभाग अनजान है. ग्रामीण बताते हैं कि क़रीब दो साल पहले भी इस संबंध में एक जाँच दल गाँव में आया था और लोगों की जाँच की थी. साथ ही पानी की समस्या की जाँच करने के लिए भी PHE विभाग के अधिकारी पानी के सैम्पल लेकर गए थे. गोहद अनुभाग के BMO डॉक्टर आलोक शर्मा ने बताया कि यहां के लोगों की समस्या वाक़ई में चिंतनीय है. लोग इलाज कराने के बाद भी ठीक नहीं हो पा रहे हैं. कई ऐसे लोग हैं जो अब बैसाखी के सहारे हैं.
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हालांकि इस बीमारी का पता लगाने के लिए जल्द ही बोन बायोप्सी की मदद लिए जाने पर विचार किया जा रहा है. जिससे यह पता चल सके की यह किस तरह की बीमारी है. डॉक्टर आलोक शर्मा ने बताया लोगों को इस बात की शंका है कि उनके क्षेत्र में उपलब्ध भूजल से ही उन्हें यह समस्या हो रही है, लेकिन पूर्व में जब PHE द्वारा इसकी जाँच कराई गई थी. तब पानी में किसी तरह की कोई कमी नहीं मिली थी. अब एक बार फिर PHE विभाग द्वारा इस पानी के सैंपल लिए जा रहे हैं और जल्द ही इसकी जांच कराई जाएगी.
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