संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल की सड़कों पर दौड़ते वाहन…लगातार बजते हॉर्न और चौराहों पर गूंजता शोर शहर में ध्वनि प्रदूषण को लेकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट ने चौंकाने वाली तस्वीर सामने रखी है। 69 प्रमुख चौराहों की जांच में 47 जगह शोर का स्तर निर्धारित मानकों से ज्यादा मिला। कहीं 80 तो कहीं करीब 90 डेसिबल तक आवाज दर्ज की गई। खास बात ये है कि जांच के दौरान ज्यादातर चौराहों पर ट्रैफिक अनाउंसमेंट सिस्टम बंद थे, इसके बावजूद शोर का स्तर ज्यादा मिला। आखिर भोपाल की सड़कों पर शोर बढ़ने की वजह क्या है और इस पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार विभाग क्या कर रहे है?

भोपाल में ध्वनि प्रदूषण की हकीकत जानने के लिए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने शहर के 69 प्रमुख चौराहों पर ध्वनि स्तर की जांच की। 21 से 24 सितंबर के बीच सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक की गई। इस जांच में 47 चौराहों पर शोर निर्धारित मानकों से अधिक मिला, जबकि 22 चौराहों पर ध्वनि स्तर तय सीमा के भीतर दर्ज किया गया। व्यावसायिक क्षेत्रों में दिन के समय ध्वनि की निर्धारित सीमा 65 डेसिबल है, जबकि आवासीय क्षेत्रों में यह सीमा 55 डेसिबल है। लेकिन राजधानी के कई चौराहों पर शोर इन सीमाओं को काफी पीछे छोड़ता नजर आया।

  • काली मंदिर तिराहा – 89.90 डेसिबल
  • अल्पना तिराहा – 88.56 डेसिबल
  • बैरागढ़ रेलवे स्टेशन चौराहा – 85.21 डेसिबल
  • बेस्ट प्राइस करोंद तिराहा -85.13 डेसिबल
  • नादरा बस स्टैंड – 84.78 डेसिबल

यहां ध्वनि का स्तर ज्यादा

ये है राजधानी भोपाल का एक व्यस्त चौराहा… जहां हर मिनट वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। कोई जल्दी में है, कोई लगातार हॉर्न बजा रहा है, तो कहीं ट्रैफिक के बीच गाड़ियों के इंजन की आवाज सुनाई दे रही है। यही आवाजें मिलकर शोर का ऐसा स्तर बना रही हैं, जो तय मानकों से काफी ऊपर पहुंच रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा औसत शोर काली मंदिर तिराहे पर दर्ज किया गया। अल्पना तिराहे और प्रभात पेट्रोल पंप चौराहे पर भी ध्वनि स्तर काफी अधिक मिला। यानी समस्या किसी एक सड़क या एक चौराहे तक सीमित नहीं है। शहर के कई प्रमुख ट्रैफिक पॉइंट पर शोर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है।

जोखिम बढ़ सकता है

लगातार तेज शोर को नजरअंदाज करना भी सेहत के लिए नुकसानदेह हो सकता है। लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से तनाव, नींद में परेशानी और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का जोखिम बढ़ सकता है। बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है।

आंकड़े चिंताजनक

भोपाल के चौराहों पर शोर की यह तस्वीर बताती है कि ध्वनि प्रदूषण अब सिर्फ असुविधा नहीं बल्कि शहरी जीवन की एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट सामने है और आंकड़े भी चिंताजनक हैं। अब सवाल है कि क्या संबंधित विभाग इस रिपोर्ट के आधार पर ठोस कार्रवाई करेंगे। क्या राजधानी के लोगों को बेवजह के शोर से राहत मिलेगी या फिर सड़कों पर हॉर्न का शोर इसी तरह लोगों की सेहत और सुकून पर भारी पड़ता रहेगा।

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