संजय पाटीदार, भोपाल। राजधानी भोपाल में सरकारी सिस्टम की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जहां 5 करोड़ रुपये खर्च कर बनाई गई शासकीय होम्योपैथी फार्मेसी 14 साल बाद भी दवा नहीं बना पाई। जी हां मध्यप्रदेश के एकमात्र शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में करोड़ों की लागत से बना होम्योपैथिक फार्मेसी भवन आज खुद इलाज मांग रहा है। साल 2012 में दवा निर्माण के लिए तैयार हुआ यह भवन मशीनों और उपकरणों के इंतजार में 14 साल से बंद पड़ा है। करीब 5 करोडं रुपए की फार्मेसी बिल्डिंग बीते 14 सालों से बेकार पड़ी है।

राजधानी भोपाल स्थित मध्यप्रदेश के एकमात्र शासकीय होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज में स्थापित की गई 5 करोड़ रुपए की फार्मेसी बिल्डिंग बीते 13 वर्षों से बेकार पड़ी है। यह फार्मेसी भवन वर्ष 2012 में दवा निर्माण के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन उपकरणों की खरीदी न हो पाने के कारण यह अब तक शुरू नहीं हो सका है। नतीजतन, यह बहुमूल्य भवन अब जर्जरता की कगार पर पहुंच चुका है।

दवा उत्पादन का सपना अब तक अधूरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें केंद्र ने करीब 2 करोड़ और राज्य सरकार ने 3 करोड़ रुपये खर्च किए लेकिन जिम्मेदार विभाग यह तक तय करने में सालों लगा बैठे कि उपकरण खरीदेगा कौन? नतीजा ये कि जिस फार्मेसी से हर साल 20 करोड़ रुपये की दवाएं बनाने की उम्मीद थी वहां आज तक उत्पादन शुरू नहीं हुआ। अब भवन में सीलन है, छत टपक रही है और प्लास्टर झड़ने लगा है और कांच टूटने लगे हैं, भवन क्षतिग्रस्त होने लगा है। यानी सरकारी खजाने से पैसा खर्च हुआ, भवन बन गया लेकिन दवा उत्पादन का सपना अब तक अधूरा है।

शासकीय होम्योपैथिक फार्मेसी में शुरुआत में उपकरणों की खरीदी को लेकर आयुष विभाग और मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सप्लाई कॉरपोरेशन के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट नहीं थी। साल 2019 में कॉरपोरेशन ने उपकरणों की आपूर्ति के लिए कंपनियां सामने नहीं आने का हवाला देकर कदम पीछे खींच लिए। इसके बाद खरीदी की जिम्मेदारी आयुष संचालनालय को दी गई लेकिन प्रक्रिया फिर भी आगे नहीं बढ़ सकी। फार्मेसी में जिन मशीनों की आवश्यकता होती है, उनमें हर्बल ग्राइंडर, डोजिंग यूनिट, ड्रग टेस्टिंग मशीनें और पैकिंग सिस्टम, वे विशिष्ट मानकों के अनुसार होनी चाहिए।

अपनाया जाएगा तामिलनाडु मॉडल

हालांकि अब शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज डॉ बबीता श्रीवास्तव ने कहा कि होम्योपैथी फार्मेसी जल्द शुरू होगी उपकरणों की खरीदी हो गई है। तामिलनाडु मॉडल को इस फार्मेसी में अपनाया जाएगा। 14 साल तक इस्तेमाल और रखरखाव के अभाव में अब भवन की हालत बिगड़ने लगी है। दीवारों में सीलन है, प्लास्टर झड़ रहा है और छत से पानी टपकने लगा है। अब सवाल सिर्फ मशीनें खरीदने में देरी का नहीं बल्कि करोड़ों रुपये से बनी सरकारी संपत्ति को बर्बाद होने से बचाने का भी है। अब फार्मेसी को चालू करने से पहले भवन की मरम्मत पर भी लाखों रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

बंद पड़ी फार्मेसी बिल्डिंग को लेकर सियासत शुरू हो गई है। बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है। भाजपा विधायक भगवान दास सबनानी ने कहा कि मध्य प्रदेश में सरकार आयुष के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है। लंबे समय से बंद पड़े भवन को भी जल्द शुरू किया जाएगा। बीजेपी के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस नेता मानक अग्रवाल ने कहा कि मध्य प्रदेश में होम्योपैथी भवन बनकर तैयार है। करोड़ों रुपए का भवन भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया अभी तक दवाई निर्माण के लिए शुरू नहीं हो पाया है। मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह चौपट है।

लेटलतीफी की बना मिसाल

भोपाल के शासकीय होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज में बनी होम्योपैथिक फार्मेसी सरकारी कामकाज की लेटलतीफी की मिसाल बन गई है। साल 2012 में भवन बनकर तैयार हुआ, लेकिन दवा निर्माण के लिए जरूरी मशीनें आज तक नहीं लग पाई। हालांकि शासकीय यूनानी चिकित्सालय को जरूर वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर कुछ समय के लिए इस बिल्डिंग को जरूर दिया गया है, लेकिन अपनी होम्योपैथी फार्मेसी अभी तक शुरू नहीं कर पाया है। हालांकि अब हर साल जल्द शुरू होने का दावा जरूर किया जाता है।

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