शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश परिवहन विभाग के करोड़पति पूर्व आरक्षक सौरभ शर्मा की जमानत का कांग्रेस ने विरोध किया। कांग्रेस ने लोकायुक्त को भंग करने की मांग की है। वहीं प्रदेश में खुलेआम भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। साथ ही कहा कि दिल्ली के डिप्टी सीएम को छह महीने जमानत नहीं मिलती, लेकिन एक पूर्व कांस्टेबल जो भ्रष्टाचार में रंगे हाथों पकड़ा गया उसे जमानत मिल गई।

बुधवार को कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने कहा कि प्रदेश में खुलेआम भ्रष्टाचार चल रहा है। जिन अधिकारियों के कारण चालान पेश नहीं हुआ उन पर कार्रवाई होना चाहिए। लोकायुक्त तत्काल भंग कर दूसरी संस्था बननी चाहिए, जिससे सही तरह से जांच हो सके।

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कांग्रेस ने पूछे ये सवाल

उन्होंने कहा कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री को 6 महीने जमानत नहीं मिलती, लेकिन एक पूर्व कांस्टेबल जो भ्रष्टाचार में रंगे हाथों पकड़ा गया उसे जमानत मिल गई। बीजेपी जनता की आंखों में धूल झोंकने में लगी हुई है। हम सरकार से पूछना चाहते हैं कि 60 दिन में चालान पेश क्यों नहीं किया। जांच के बीच में लोकायुक्त डीजी जयदीप प्रसाद को क्यों हटाया गया। भ्रष्टाचार के मामले में 576 मामलों में अभियोजन की स्वीकृति क्यों नहीं दे रही है।

पहरेदार की बजाय हिस्सेदार हो गई लोकायुक्त- मुकेश नायक

मुकेश नायक ने आगे कहा कि लोकायुक्त पहरेदार होने की बजाय हिस्सेदार हो गई है। ऐसी संस्था को भंग कर देना चाहिए, जो भ्रष्टाचार में शामिल हो गई है। सौरभ शर्मा मामले की जांच हाईकोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए।

कांग्रेस कार्यालय के बाहर विरोध, कार्यकर्ताओं ने जलाया पुतला

वहीं कांग्रेस ने प्रदेश कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन भी किया। कांग्रेस ने कहा कि लोकायुक्त 60 दिन में चालान पेश नहीं कर सकी, ऐसी संस्था किस काम की जो चालान नहीं पेश कर पाई। वहीं कांग्रेस ने लोकायुक्त को भंग करने की मांग की है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने लोकायुक्त का पुतला भी जलाया। पुलिस के पुतला छीनने के दौरान जमकर धक्कामुक्की हुई।

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लोकायुक्त ने दी जमानत, IT-ED में दर्ज मामलों में जेल में ही रहेंगे

गौरतलब है कि 55 किलो सोना और 10 करोड़ कैश कांड में सौरभ शर्मा उसके साथी शरद जायसवाल और चेतन गौर को लोकायुक्त ने हिरासत में लिया था। पूछताछ के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहां लोकायुक्त को आरोपियों की रिमांड दी गई थी। लोकायुक्त 60 दिन में चालान पेश नहीं कर सकी। जिसकी वजह से उन्हें जमानत मिल गई है। हालांकि, आरोपियों को जमानत केवल लोकायुक्त में दर्ज मामलों में दी गई है। ईडी और आईटी में दर्ज मामलों में तीनों आरोपी फिलहाल जेल में ही रहेंगे।

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