शब्बीर अहमद, भोपाल। आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़े मामले में बड़ा एक्शन लिया गया है। मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने ‘रतलाम पब्लिक स्कूल’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस स्कूल में अब आगे कोई भी भर्ती या प्रवेश परीक्षा नहीं होगी।

विवादित कंपनी के पास थी परीक्षा की जिम्मेदारी

दरअसल, ‘रतलाम पब्लिक स्कूल’ सेंटर में 12 अभ्यर्थियों पर फर्जीवाड़ा करने का आरोप है। मुंबई की विवादित कंपनी ‘एप्टेक लिमिटेड’ के पास परीक्षा करवाने की जिम्मेदारी थी। एप्टेक कंपनी पहले भी विवादों में रही है। यह कंपनी उत्तर प्रदेश और असम में ब्लैकलिस्टेड है। इतना ही नहीं जम्मू कश्मीर, लद्दाख में इस कंपनी के खिलाफ मामला भी दर्ज है। पेपर लीक और स्क्रीन शेयरिंग में केस दर्ज है। फिलहाल मध्य प्रदेश में इस कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है और न ही FIR में नाम है।

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ये है पूरा मामला

मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल ने आबकारी आरक्षक भर्ती परीक्षा-2024 में गड़बड़ी का खुलासा करते हुए 12 अभ्यर्थियों के खिलाफ FIR दर्ज कराई है। बताया गया यह सभी अभ्यर्थी रतलाम स्थित ‘रतलाम पब्लिक स्कूल’ परीक्षा केंद्र पर एग्जाम देने पहुंचे थे, जिसे इस परीक्षा के लिए पहली बार केंद्र बनाया गया था। जांच में सामने आया कि इन अभ्यर्थियों ने कंप्यूटर आधारित परीक्षा में असामान्य रूप से तेज गति दिखाई। दो घंटे की परीक्षा में किसी ने 15 तो किसी ने 30 मिनट में ही 100 प्रश्न हल कर दिए और शेष समय बिना किसी गतिविधि के बैठे रहे।

जांच में यह भी आया सामने

मंडल ने 5 फरवरी को परिणाम जारी करने से पहले उच्च परसेंट हासिल करने वाले अभ्यर्थियों के डेटा की जांच की। जिसमें पाया गया कि सभी 12 अभ्यर्थी पहले पुलिस भर्ती और अन्य परीक्षाओं में शामिल हो चुके थे। रतलाम पब्लिक स्कूल में आयोजित परीक्षा थी, लेकिन तब इनके अंक 50 से भी कम थे। वहीं, इस परीक्षा में अचानक 90 से ज्यादा अंक प्राप्त कर 100 पर्सेंटाइल हासिल कर लिया।

अलग-अलग तारीख और शिफ्ट में परीक्षा लेकिन एग्जाम सेंटर एक

स्कूल के सीसीटीवी फुटेज और परीक्षा लॉग डेटा की जांच में यह भी सामने आया कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पर किसी एक व्यक्ति की मदद मिली थी। इस मामले की खास बात यह है कि ये सभी अभ्यर्थी अलग-अलग तारीखों और शिफ्ट में परीक्षा देने पहुंचे थे, लेकिन उनका एग्जाम सेंटर एक ही था। मदद करने वाला भी एक ही व्यक्ति बताया जा रहा है। जांच में यह भी सामने आया कि इन अभ्यर्थियों ने परीक्षा के दौरान न तो रफ वर्क किया और न ही कंप्यूटर स्क्रीन पर सामान्य गतिविधि दिखाई। अधिकांश समय वे बिना किसी हलचल के बैठे रहे और निर्धारित समय में केवल उत्तर विकल्पों को चुनते रहे।

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