मध्य प्रदेश में मंगलवार को जनसुनवाई हुई। अलग-अलग जिलों में लोगों ने कलेक्ट्रेट में पहुंचकर अफसरों से अपनी पीड़ा सुनाई। इस दौरान दिल दहलाने वाली घटनाएं सामने आईं तो कुछ जगह पीड़ितों की परेशानियां सुनकर लोगों का दिल पसीज उठा। जानिए कहां पर किस तरह के मामले सामने आए…
सिस्टम के खिलाफ अन्नदाता’ की चीख
अनिल सक्सेना, रायसेन। मध्य प्रदेश के रायसेन में उस वक्त हंगामा मच गया, जब जनसुनवाई के दौरान किसान ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह की कोशिश की। इस घटना से वहां मौजूद हर किसी का दिल दहल उठा।
दरअसल, हरिसिंह अहिरवार ने लाइनमैन और JE पर वसूली का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि सुण्ड में उसके पिता की कृषक भूमि है जिसमें वह वह किसानी करता है। लेकिन 15 में से 12 हजार बिल भरने के बाद भी उसकी बिजली काट दी गई और अवैध वसूली की जाती है। अगर पानी नहीं मिला तो उसकी फसल नष्ट हो जाएगी।
इन चीजों से परेशान होकर किसान ने कलेक्टर से गुहार लगाई। लेकिन परेशान होकर उसने खुद पर पेट्रोल डाल लिया और आत्मदाह की कोशिश करने लगा। तभी पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उसके हाथ से पेट्रोल की बोतल छीनी जिससे बड़ा हादसा टल गया।
बुरहानपुर में परेशान दिव्यांग ने लगाई गुहार
दीपक सोहले, बुरहानपुर। जिले के नेपनागर के ग्राम बाकडी की दिव्यांग दंपत्ति कलेक्टर पहुंची। पत्नी दोनों पैरों से दिव्यांग है तो वहीं पति दोनों आंखों से नही देख पाता है। उनके चार बच्चे भी हैं। वे परिवार का पालन पोषण भीख मांग कर करते हैं। पत्नी की दिव्यांग पेंशन चालू है लेकिन लाडली बहना योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। साथ ही पति को कोई पेंशन नहीं मिल रही है। शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए वे दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
दिव्यांग दंपत्ति जब अपनी पेंशन की गुहार लेकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे तो उन्हें बेरंग लौटना पड़ा, क्योंकि इनकी ई केवायसी नहीं हो पाई थी। पंचायत के जिम्मेदार इन्हें किसी भी योजनाओं का लाभ नही दिया जा रहा है। पत्नी शारदा को तो पेंशन मिल रही है लेकिन उसे भी सिर्फ दिव्यांग पेंशन के नाम पर मात्र 600 रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं बात करें तो उसके पति तेलु दोनों आंखों से नही देख पाता है। लेकिन इसे किसी प्रकार की कोई पेंशन का लाभ नहीं है और न ही पीएम आवास का लाभ मिला है। गांव बाकडी में दंपत्ति अपनी चार बेटियों के साथ रहते हैं। इन्हें लाडली लक्ष्मी योजना का लाभ भी नही मिला है, यह परिवार भीख मांग कर अपना जीवन यापन करता है। आज कलेक्टर कार्यालय पहुंचे थे लेकिन यह परिवार बेरंग वापस लौटना पड़ा। कलेक्टर कार्यालय से लेकर हाइवे तक दंपत्ति को व्हील चेयर भी उपलब्ध नही कराइ गई, दोनों अपने बच्चों के सहारे हाइवे तक पहुंचे।
इस मामले में सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक दुर्गेश कुमार दुबे से चर्चा की गई तो उनका कहना था कि दंपत्ति का ई केवायसी नहीं हुआ है, जिस कारण इन्हें इसका लाभ नही मिल पा रहा है। शिविर भी लगाए जाते हैं लेकिन यह लोग नहीं आ पाते जिस कारण इन्हें इस प्रकार की दिक्कतें आती है।
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