राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश से खाली हुई राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव की प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार आज से इस सीट के लिए नामांकन पत्र दाखिल किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है और कुछ ही देर में इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी जाएगी। एल. मुरुगन अप्रैल 2024 में मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे और उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन उनके इस्तीफे के बाद यह सीट रिक्त हो गई थी, जिस पर अब उपचुनाव कराया जा रहा है।
नामांकन से लेकर मतदान तक का पूरा शेड्यूल
चुनाव आयोग के घोषित कार्यक्रम के मुताबिक इस उपचुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर तय की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को प्राप्त हुए नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी जबकि उम्मीदवार आगामी 5 नवंबर तक अपने नाम वापस ले सकेंगे। यदि चुनाव की स्थिति बनती है, तो आगामी 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। हालांकि राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए यदि कांग्रेस पार्टी अपना कोई प्रत्याशी नहीं उतारती है, तो यह चुनाव निर्विरोध भी संपन्न हो सकता है।
बीजेपी खेमे में दावेदारों के नाम पर चर्चा जोरों पर
रिक्त हुई इस राज्यसभा सीट के लिए भारतीय जनता पार्टी के भीतर कई बड़े नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार केंद्रीय नेतृत्व की ओर से किसी बड़े चेहरे को मैदान में उतारा जा सकता है। संभावित दावेदारों की सूची में तमिलनाडु भाजपा की पूर्व विधायक वनथी श्रीनिवासन का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। इसके अलावा पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम भी शामिल है, जिनका उत्तर प्रदेश से राज्यसभा का कार्यकाल आगामी 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। केंद्रीय स्तर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति इरानी के नाम की भी चर्चा है। वहीं प्रदेश स्तर से राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक आशीष अग्रवाल, प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया, पूर्व उपाध्यक्ष विनोद गोटिया, प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेंद्र बरुआ और पूर्व मंत्री रंजना बघेल के नाम भी दौड़ में बताए जा रहे हैं।
विधानसभा का संख्या बल और जीत का गणित
मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा राजनीतिक गणित को देखें तो कुल 230 सदस्यीय सदन में बहुमत का आंकड़ा स्पष्ट है। सदन में एक सीट जीतने के लिए ‘आधे से एक अधिक’ यानी कम से कम 116 मतों का कोटा जरूरी है। वर्तमान में विधानसभा के कुल 230 सदस्यों में से सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के चलते कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा इस मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगे, जिसके कारण कुल 229 विधायक ही वोटिंग कर सकेंगे।
बीना से कांग्रेस के टिकट पर चुनी गईं विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी काफी अहम बनी हुई है। हालांकि उन्होंने अघोषित रूप से बीजेपी का दामन थाम लिया है लेकिन तकनीकी रूप से वे अभी भी खुद को कांग्रेस विधायक बताती हैं। यदि मतदान की नौबत आती है, तो निर्मला सप्रे का वोट भी भाजपा के खाते में जा सकता है। वर्तमान में विधानसभा में संख्या बल पूरी तरह से बीजेपी के पक्ष में है, जिससे पार्टी प्रत्याशी की जीत लगभग तय मानी जा रही है।
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