जयपुर। राजस्थान के तीन कांग्रेस सांसदों द्वारा अपने क्षेत्र से बाहर सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि (MPLADS) की राशि देने पर भाजपा ने सवाल उठाए थे, लेकिन अब सामने आया है कि कांग्रेस ही नहीं, बल्कि भाजपा के सांसदों ने भी अन्य राज्यों में अपने सांसद कोष से राशि जारी की है. इस सूची में भाजपा के चार राज्यसभा सांसदों के साथ एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल है.

जानकारी के अनुसार, राजस्थान से बाहर सांसद निधि जारी करने वालों में केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, राज्यसभा सांसद घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया और राजेन्द्र गहलोत शामिल हैं. इन सांसदों ने विभिन्न राज्यों में जनोपयोगी कार्यों के लिए एमपीएलएडी फंड का उपयोग किया है.
भाजपा सांसदों ने कहां खर्च की सांसद निधि
- घनश्याम तिवाड़ी (राज्यसभा सांसद): हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के सुमेरपुर जनपद में धर्मशाला विकास कार्य के लिए 5 लाख रुपए और उत्तर प्रदेश के अयोध्या में सोलर पैनल स्थापना के लिए 20 लाख रुपए जारी किए.
- रवनीत सिंह बिट्टू (केंद्रीय मंत्री): करनाल, अमृतसर और जालंधर क्षेत्रों में करीब 20 लाख रुपए सांसद कोष से जारी किए गए. यह राशि अस्पताल, स्कूल और ट्रस्ट से जुड़े कार्यों में खर्च हुई.
- चुन्नीलाल गरासिया (राज्यसभा सांसद): उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और शाहजहांपुर में एलईडी लाइट लगाने के लिए 49 लाख रुपए सांसद निधि से दिए.
- राजेन्द्र गहलोत (राज्यसभा सांसद): उत्तर प्रदेश के आगरा में वाटर टैंक और हाईमास्ट लाइटों के लिए सांसद कोष से राशि जारी की गई. इसके अलावा मऊ जिले में एक बच्चे को सुनने की मशीन भी सांसद निधि से उपलब्ध कराई गई.
सियासी बयानबाजी तेज
इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है. कांग्रेस सांसद संजना जाटव ने कहा कि जब भाजपा सांसद भी अन्य राज्यों में सांसद निधि दे रहे हैं, तो कांग्रेस सांसदों पर ही सवाल खड़े करना उचित नहीं है. उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया.
वहीं, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसदों ने अपने राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए सांसद निधि का दुरुपयोग किया है. उन्होंने कहा कि सांसद निधि का उद्देश्य जनता को राहत देना है, न कि राजनीतिक हित साधना.
क्या कहता है नियम
नियमों के अनुसार, लोकसभा और राज्यसभा सांसद एक वित्तीय वर्ष में अपने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से अधिकतम 50 लाख रुपए तक की राशि अन्य राज्यों में खर्च कर सकते हैं. हालांकि, राजनीतिक हलकों में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि जब अपने-अपने राज्यों में विकास कार्यों की कोई कमी नहीं है, तो दूसरे राज्यों में सांसद निधि खर्च करना कितना उचित है. इस पर नैतिकता को लेकर भी बहस छिड़ गई है.
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