नालंदा। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने नालंदा जिले में एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार को नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर (BCM) मनजीत कुमार को निगरानी की टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी की इस गिरफ्तारी से जिले के प्रशासनिक गलियारे में हड़कंप मच गया है।

​आशा कार्यकर्ता बहाली के नाम पर मांगी थी घूस

​मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार बीसीएम मनजीत कुमार ने आशा कार्यकर्ता की बहाली कराने के नाम पर एक स्थानीय अभ्यर्थी बॉबी कुमारी से सौदेबाजी की थी। आरोप है कि बीसीएम ने बहाली प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के एवज में बॉबी कुमारी से कुल 25,000 रुपये की मांग की थी। प्रार्थिया ने बार-बार गुहार लगाई, लेकिन आरोपी बिना पैसे लिए काम करने को तैयार नहीं था।

​निगरानी विभाग ने बिछाया जाल

​भ्रष्टाचार से परेशान होकर बॉबी कुमारी ने इसकी लिखित शिकायत पटना स्थित निगरानी विभाग के मुख्यालय में की। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गुप्त तरीके से आरोपों का सत्यापन कराया। जांच में मामला सही पाए जाने के बाद, विभाग ने एक विशेष धावा दल का गठन किया और आरोपी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।

​रंगे हाथ पकड़ा गया आरोपी

​योजना के मुताबिक, गुरुवार को जैसे ही बॉबी कुमारी ने रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10,000 रुपये बीसीएम मनजीत कुमार को थमाए, वैसे ही सादे लिबास में तैनात निगरानी के अधिकारियों ने उसे दबोच लिया। आरोपी के पास से रिश्वत की वह राशि भी बरामद कर ली गई है। गिरफ्तारी के तुरंत बाद टीम उसे अपने साथ पटना ले गई, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर उसे जेल भेजा जाएगा।

​नगरनौसा में भ्रष्टाचार पर दूसरा प्रहार

​हैरानी की बात यह है कि नगरनौसा प्रखंड में एक सप्ताह के भीतर भ्रष्टाचार पर यह दूसरा बड़ा प्रहार है। इससे पहले 20 मार्च को निगरानी ने इसी इलाके के बीपीआरओ (BPRO) को 12 हजार रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले में सरकारी योजनाओं और नियुक्तियों में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। फिलहाल, निगरानी की इस सक्रियता से भ्रष्ट अधिकारियों में भारी खौफ देखा जा रहा है।