दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। आस्था के केंद्र और पवित्र नर्मदा नदी के तट पर स्थित ‘राजघाट’ के कायाकल्प के नाम पर भारी भ्रष्टाचार और घोर धांधली का मामला सामने आया है। पूर्व सांसद व वर्तमान शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की निधि से नगर पालिका की ओर से कराया जा रहा 2 करोड़ 54 लाख 23 हजार रुपये का सौंदर्यकरण कार्य शुरू होते ही विवादों में घिर गया है। निर्माण कार्य की घटिया गुणवत्ता को लेकर अब शासन-प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
श्मशान की काली मिट्टी और इंसानी अवशेषों का खेल
राजघाट के नवनिर्माण का आधार (बेस) तैयार करने के लिए जिस मिट्टी का भराव किया जा रहा है, वह बेहद घटिया और संदेहास्पद है। मिट्टी में इंसानी शरीर की हड्डियां, अधजले बांस और अंतिम संस्कार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री साफ नजर आ रही है। आरोप है कि ठेकेदार और निर्माण एजेंसी नया मटीरियल खरीदने का पैसा बचाने के लिए नर्मदा किनारे श्मशान घाट के पास जमा मिट्टी और गाद को ही खोदकर भराव में इस्तेमाल कर रहे हैं। पास ही में अवैध उत्खनन के गहरे गड्ढे भी मिले हैं, जिससे नर्मदा तट पर भीषण कटाव का खतरा मंडरा रहा है।

उद्घाटन से पहले ही फटने लगीं आरसीसी दीवारें
लापरवाही का आलम यह है कि जिस आरसीसी की मुख्य दीवार पर इस पूरे राजघाट के नव-निर्माण का भार टिकना है, उसमें काम पूरा होने से पहले ही बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं। 2017 में 36 लाख रुपये की लागत से बना आधुनिक शवदाह गृह भी पहले ही बदहाली का शिकार हो चुका है और अब नए बजट में फिर से वही खेल दोहराया जा रहा है।
मामले पर जांच और कार्रवाई का भरोसा
मामला तूल पकड़ते ही नगर पालिका अध्यक्ष नीतू महेंद्र यादव ने कहा कि “यदि निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं हो रहा है तो यह गंभीर मामला है। घटिया मिट्टी को दोबारा खुदवाकर बाहर फेंका जाएगा और लापरवाही बरतने वाली निर्माण एजेंसी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।”

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