गुलशन कुमार, नारनौल. हरियाणा के नारनौल अनाज मंडी में बाजरे की खरीद जारी है। बड़ी संख्या में किसान फसल लेकर मंडी पहुंच रहे हैं। मंडी के बाहर सड़क के दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लगी हैं। इस बीच किसानों ने सरकार की ओर से घोषित 600 रुपये प्रति क्विंटल तक की भावांतर भरपाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि बाजार भाव कम रहने पर वास्तविक अंतर के हिसाब से सहायता मिलनी चाहिए।

2,200 रुपये भाव मिलने पर 100 रुपये का अंतर: किसान

किसानों के मुताबिक, मंडी में प्रवेश के दौरान कुछ समय इंतजार करना पड़ रहा है। हालांकि, गेट के अंदर पहुंचने के बाद करीब 5 से 7 मिनट में गेट पास मिल रहा है।

भावांतर भरपाई को लेकर किसानों ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि बाजरे का बाजार भाव 2,400 रुपये प्रति क्विंटल रहता है, तो उनके बताए हिसाब से सरकार की ओर से 500 रुपये की सहायता मिलेगी। वहीं, बाजार भाव 2,200 रुपये प्रति क्विंटल होने पर अंतर 700 रुपये का होगा। ऐसे में 600 रुपये प्रति क्विंटल की सहायता मिलने पर 100 रुपये का अंतर किसान को खुद उठाना पड़ेगा। किसानों की मांग है कि बाजार भाव कम रहने पर उन्हें वास्तविक अंतर के अनुसार भरपाई दी जाए।

किसानों की समस्याएं सुनने मंडी पहुंचे कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष

बाजरे की खरीद और भावांतर भरपाई के मुद्दे पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी नारनौल अनाज मंडी पहुंचे। उनके साथ कांग्रेस के महेंद्रगढ़ जिला अध्यक्ष और अन्य पार्टी नेता मौजूद रहे। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं।

राव नरेंद्र सिंह ने मांग की कि बाजार भाव कम रहने की स्थिति में किसानों को अंतर की उचित भरपाई मिलनी चाहिए। उन्होंने खाद की उपलब्धता का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि किसानों को समय पर खाद मिलनी चाहिए, ताकि खेती के काम में परेशानी न हो। कांग्रेस नेताओं ने किसानों की मांगें सरकार तक पहुंचाने की बात कही।

अब तक एक लाख क्विंटल बाजरे की खरीद

नारनौल मार्केट कमेटी के सचिव नुकुल यादव के अनुसार, मंडी में अब तक करीब एक लाख क्विंटल बाजरे की खरीद हो चुकी है। लगभग 19 हजार किसानों ने पंजीकरण कराया है। इनमें से करीब 3,600 किसान मंडी पहुंच चुके हैं।

उन्होंने बताया कि मंडी में बाजरे का भाव लगभग 2,300 रुपये से 2,450 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। किसानों को सुविधाएं देने और भीड़ नियंत्रित करने के लिए रोस्टर प्रणाली लागू की गई है। इसका उद्देश्य एक साथ बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने से होने वाली अव्यवस्था को रोकना है।