नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) ने लुटियंस दिल्ली में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए नए नियम तैयार किए हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, इन नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का भी प्रावधान किया गया है। नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन के लिए लिए जाने वाले मासिक यूजर चार्ज में भी बढ़ोतरी की जाएगी। NDMC क्षेत्र में नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए कम्युनिटी पेट्रोलर और सफाई समितियों के गठन का भी प्रावधान किया गया है। ये स्थानीय स्तर पर कचरा प्रबंधन से जुड़े नियमों के पालन की निगरानी में भूमिका निभाएंगे। परिषद ने नए कचरा प्रबंधन नियमों को मंजूरी दे दी है। अब इन्हें अंतिम नोटिफिकेशन के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास भेजा जाएगा। मंत्रालय से आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन नियमों को लागू किया जा सकेगा।

ऑटो-टिप्पर में कचरे के लिए चार अलग-अलग हिस्से

NDMC के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, घर-घर जाकर कचरा एकत्र करने वाले ऑटो-टिप्पर में चार अलग-अलग हिस्से बनाए गए हैं। हर ऑटो-टिप्पर के साथ एक हेल्पर भी तैनात किया गया है, ताकि कचरा संग्रहण के दौरान ही उसे अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जा सके। नए नियमों में ‘प्राइमरी कलेक्शन’ की व्यवस्था को भी स्पष्ट किया गया है। इसके तहत घरों और कचरा पैदा करने वाली अन्य जगहों से स्रोत पर अलग किए गए कचरे को सीधे एकत्र कर सेकेंडरी स्टोरेज या ट्रांसफर पॉइंट तक पहुंचाना शामिल है। नए नियमों में मासिक यूजर चार्ज बढ़ाने का भी प्रस्ताव रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, प्रस्तावित शुल्क 2018 में जारी अधिसूचना में तय किए गए यूजर चार्ज की तुलना में अधिक होंगे।

मासिक कचरा शुल्क में बढ़ोतरी, घरों से लेकर रेस्टोरेंट तक पर पड़ेगा असर

NDMC के नए कचरा प्रबंधन नियमों के तहत अलग-अलग श्रेणियों के लिए मासिक यूजर चार्ज बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, शुल्क कचरा पैदा करने वाले की श्रेणी और उसे उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के आधार पर तय किया जाएगा। प्रस्तावित दरों के अनुसार, 50 वर्ग मीटर तक के रिहायशी घरों का मासिक शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये किया जाएगा। वहीं, 50 से 200 वर्ग मीटर के प्लॉट के लिए शुल्क 100 रुपये से बढ़कर 200 रुपये और 200 वर्ग मीटर से बड़े घरों के लिए 200 रुपये से बढ़कर 300 रुपये हो जाएगा। सड़क किनारे सामान बेचने वाले विक्रेताओं के लिए मासिक शुल्क 100 रुपये से बढ़ाकर 200 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसी तरह गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं के लिए शुल्क 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये किया जाएगा।

रेस्टोरेंट के लिए भी बढ़ेगा शुल्क

50 सीट तक की क्षमता वाले रेस्टोरेंट के लिए मासिक यूजर चार्ज 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का प्रस्ताव है। वहीं, इससे अधिक सीटिंग क्षमता वाले रेस्टोरेंट को 3,000 रुपये के बजाय 4,500 रुपये प्रति माह देना होगा। NDMC के एक अधिकारी के मुताबिक, यूजर चार्ज तय करने के पीछे मूल सिद्धांत यह है कि कचरा पैदा करने वाले की श्रेणी और उसे उपलब्ध कराई जाने वाली सेवाओं के आधार पर शुल्क निर्धारित किया जाए।

कचरा अलग नहीं किया तो बढ़ा जुर्माना, RWA से लेकर होटल तक पर सख्ती

NDMC के प्रस्तावित नए कचरा प्रबंधन नियमों में जुर्माने और पेनल्टी की राशि भी बढ़ाई गई है। नियमों के तहत कचरे को स्रोत पर अलग-अलग नहीं करने पर अलग-अलग श्रेणियों के लिए अलग जुर्माना लगाया जाएगा। घरों में कचरा अलग नहीं करने पर जुर्माना 200 रुपये से बढ़ाकर 500 रुपये किया गया है। वहीं क्लब और सिनेमा हॉल जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लिए यह राशि 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये और शादी एवं बैंक्वेट हॉल के लिए 10,000 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये करने का प्रस्ताव है।

खुले में कचरा जलाने पर 7,500 रुपये जुर्माना

खुले में कचरा जलाने पर भी सख्ती बढ़ाई गई है। इसके लिए जुर्माना 5,000 रुपये से बढ़ाकर 7,500 रुपये किया गया है। वहीं कचरे का उचित तरीके से निपटान नहीं करने वाले वेंडरों पर 200 रुपये के बजाय 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। अधिक मात्रा में कचरा पैदा करने वाले प्रतिष्ठानों और संस्थाओं के लिए भी अधिक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नियमों का पालन नहीं करने पर RWA पर 15,000 रुपये, मार्केट एसोसिएशन पर 30,000 रुपये और होटल पर 74,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। पहले इनकी राशि क्रमशः 10,000, 20,000 और 50,000 रुपये थी।

कचरे को सिर्फ ठिकाने लगाने के बजाय रीसाइक्लिंग पर जोर

NDMC के अधिकारियों के मुताबिक, नए कचरा प्रबंधन सिस्टम का उद्देश्य सिर्फ कचरा इकट्ठा कर उसे किसी स्थान पर पहुंचाकर निपटाना नहीं है। नई व्यवस्था में कचरे को स्रोत पर अलग करने, उससे उपयोगी सामग्री निकालने, रीसाइक्लिंग और विकेंद्रीकृत तरीके से प्रोसेसिंग पर ज्यादा जोर दिया जाएगा। अधिकारी के अनुसार, व्यवस्था का मकसद कचरे से अधिकतम उपयोगी संसाधन हासिल करना है, ताकि कचरे का ज्यादा से ज्यादा हिस्सा दोबारा इस्तेमाल या रिसाइकिल किया जा सके। नई व्यवस्था के तहत कोशिश यह सुनिश्चित करने की होगी कि सिर्फ उसी कचरे को अंतिम निपटान के लिए भेजा जाए, जिसे किसी भी तरीके से दोबारा इस्तेमाल या प्रोसेस नहीं किया जा सकता। इससे लैंडफिल पर जाने वाले कचरे की मात्रा कम करने और कचरा प्रबंधन को अधिक टिकाऊ बनाने पर जोर रहेगा।

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