रोहित कश्यप,मुंगेली। मुंगेली में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को निःशुल्क दिये जाने वाला ट्राई सायकल खुले आसमान में सालों से अव्यवस्थित तरीके से पड़ी हुई है, जिसकी सुध लेने वाला विभाग जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा है. जानकारी के अनुसार राज्य सरकार द्वारा मुंगेली समाज कल्याण विभाग को मांग के अनुरूप वर्ष 2019 में ट्राई सायकल को हस्तांतरित किया गया था. जो अब धूल खाते कुछ कबाड़ में तब्दील हो गया, तो कुछ हो रहा है. यानी माना जा सकता है कि शासकीय राशि का पूरी तरह से दुरुपयोग विभाग की लापरवाही से हो रहा है.

समाज कल्याण विभाग के उप संचालक शारदा जायसवाल से मामले की जानकारी लेने के लिए जब उनसे सवाल किया गया तो मैडम साहिबा के तेवर ही अलग नजर आए. उन्होंने गैर जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि अब मोटर ट्राई सायकल आने की वजह से हाथ वाली ट्राई सायकल कोई नहीं ले जाता. तब उनसे पूछा गया कि जब जरूरत नही तो मांग भेजकर इतनी बड़ी संख्या में ट्राई सायकल मंगवाकर शासकीय राशि का दुरुपयोग क्यों किया गया? यहां तक कि कई ट्राई सायकल कबाड़ में तब्दील हो गई जिसका उपयोग अब कैसे होगा? तब मैडम साहिबा ने एक लाइन मे तमकते हुए यह कह दिया कि जाओ जो करना है जैसे करना है करो और अपने रूम से भाग खड़ी हुई.

सोचिए कि अगर जिम्मेदार के ये हालात है तो दिव्यांग जनों के लिए ये विभाग में कैसा व्यवहार होता होगा. इस मामले को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के नेताओ ने विभाग की लापरवाही की शिकायत सीएम से करने की बात कही हैं है.

कांग्रेस नेता का आरोप

इस मामले को लेकर कांग्रेसी नेता रामचंद्र साहू ने कहा कि कमीशनखोरी के चक्कर मे विभाग के अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा ट्राई सायकल की खरीदी कर ली है. तभी तो बचे हुए सैकड़ो की संख्या में ट्राइ सायकल को कबाड़ की तरह फेंक दिया गया है. ऐसे लापरवाह विभाग के अधिकारी के ऊपर सख़्त कार्रवाई होना चाहिए. जब जरूरत ही नहीं थी तो इतनी बड़ी संख्या में खरीदी करके शासन के पैसे की बर्बादी करने की जरूरत क्या थी?

ट्राइसाइकिल के लिए भटक रहे लोग – बीजेपी नेता

बीजेपी के जिला अध्यक्ष शैलेष पाठक ने कहा कि दिव्यांगजन आज भी ट्राई सायकिल के लिए बीजेपी कार्यालय से लेकर विधायक महोदय और अन्य जनप्रतिनिधियों के पास मांग लेकर पहुचते रहते है. इसके अलावा जनदर्शन में भी मांग करने की बात सामने आती है. लेकिन समाज कल्याण विभाग के गैर जिम्मेदार अधिकारी यदि दलील दे रहे है कि अब लोगो को इसकी जरूरत नहीं तो यह गलत बात है और यदि जब लोगो को जरूरत ही नहीं तो फिर शासन के पैसे की बर्बादी करने का अधिकार उनको किसने दिया है. यह शासन नहीं बल्कि आम जनता के पैसे की बर्बादी है. जरूरत से ज्यादा खरीदी करना और कबाड़ की तरह फेंक देना यह बिल्कुल गलत बात है. किस मद से कब औऱ कितने रुपये में खरीदी की गई है इसकी जांच होनी चाहिए और दोषी अधिकारी कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि संवदेनशील माने जाने वाले दिव्यांगजनो से जुड़े इस मसले को कलेक्टर साहब को संज्ञान में लेना चाहिए.

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