पटना। राजधानी के चर्चित नीट छात्रा मामले में कानूनी पेच फंसता नजर आ रहा है। पॉक्सो कोर्ट ने जेल में बंद हॉस्टल मालिक मनीष रंजन की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए बेउर जेल अधीक्षक को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने अगली सुनवाई के लिए 11 मार्च की तिथि तय की है।

​जेल अधीक्षक से जवाब तलब

​कोर्ट ने बेउर जेल अधीक्षक को शोकॉज नोटिस जारी कर पूछा है कि मनीष रंजन को किस कानूनी अधिकार के तहत जेल में रखा गया और उसे हर 14 दिन पर कोर्ट में पेश क्यों नहीं किया गया? जेल अधीक्षक ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा है, जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें 11 मार्च को सशरीर उपस्थित होने का निर्देश दिया।

​जांच एजेंसियों के बीच क्षेत्राधिकार का विवाद

​सुनवाई के दौरान सीबीआई और एसआईटी के बयानों में विरोधाभास दिखा। सीबीआई के वकील ने कहा कि उन्होंने अलग केस दर्ज किया है और उन्हें मनीष की जरूरत नहीं है। वहीं, एसआईटी की ओर से एसडीपीओ डॉ. अनु कुमारी ने दलील दी कि केस अब सीबीआई को हैंडओवर किया जा चुका है। इस क्षेत्राधिकार विवाद के कारण ही मनीष की जमानत पर फैसला नहीं हो सका।

​परिजनों का पुलिस और डॉक्टरों पर गंभीर आरोप

​पीड़िता के परिजनों के वकील एसके पांडेय ने जांच प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए। उन्होंने डीजीपी, एसएसपी और जांच अधिकारियों समेत इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ ‘परिवाद सह विरोध पत्र’ दायर किया है। वकील ने इन सभी को मामले में मुद्दालय (प्रतिवादी) बनाने की मांग की है और जांच में जानबूझकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।

​कोर्ट की सीबीआई को फटकार

​सुनवाई के दौरान जब सीबीआई के वकील ने विरोध जताया, तो कोर्ट ने उन्हें कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने सवाल किया कि आखिर इस गंभीर मामले में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई क्यों सुनिश्चित नहीं की गई? अब 11 मार्च को यह तय होगा कि केस का रिकॉर्ड सीबीआई कोर्ट भेजा जाएगा या जमानत अर्जी पर सुनवाई इसी कोर्ट में जारी रहेगी।