शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए सबसे बड़ा कदम उठाया है। मोहन कैबिनेट ने आज गुरुवार को जबलपुर-भोपाल-इंदौर इण्डस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए विशेष प्रयोजन कंपनी के गठन को मंजूरी दे दी। नई कंपनी का नाम होगा जबलपुर-इंदौर इकोनॉमिक कॉरिडोर डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड।

यह कंपनी पूर्णतः राज्य शासन के स्वामित्व में होगी। सरकार इसे 100 करोड़ रुपये की प्रारंभिक अंशपूंजी देगी। यह सिर्फ कंपनी की पूंजी है, पूरे प्रोजेक्ट की लागत नहीं। प्रोजेक्ट की फंडिंग PPP, बैंकों, NaBFID, NIIF, विश्व बैंक, ADB, भूमि लीज और यूजर चार्ज से जुटाई जाएगी। तेजी से फैसले हों, इसके लिए इसकी गवर्निंग काउंसिल की अध्यक्षता स्वयं मुख्यमंत्री करेंगे।

क्या है JBI कॉरिडोर

यह जबलपुर, भोपाल और इंदौर, प्रदेश के तीन बड़े आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाला आर्थिक अक्ष है। सरकार का प्लान सड़क किनारे बिखरे उद्योग लगाने का नहीं, बल्कि चुनिंदा स्थानों पर बड़े, नियोजित “प्लग-एंड-प्ले” आर्थिक हब बनाने का है। निवेशक को जमीन, बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज, डिजिटल कनेक्टिविटी सब पहले से तैयार मिलेगा, उद्योग आए और उत्पादन शुरू करे। कंपनी सड़क नहीं बनाएगी, सड़क का काम संबंधित निर्माण एजेंसियां करेंगी। कंपनी का फोकस सिर्फ उद्योग, निवेश और रोजगार पर होगा। हबों में श्रमिक आवास, अस्पताल, स्कूल, कौशल केंद्र और हरित क्षेत्र भी होंगे, यानी पूरी औद्योगिक टाउनशिप।

कितना निवेश, कितना रोजगार

प्रथम चरण में 3 से 5 प्राथमिक हब लगभग 10 हजार एकड़ में बनेंगे। मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 1 लाख प्रत्यक्ष व 2 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना है। पूर्ण विकास पर 3 साल में 3 लाख करोड़ से अधिक निवेश और 6 लाख से अधिक रोजगार का लक्ष्य है। कंपनी को निवेश क्षेत्र विकास अधिनियम 2013 और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस अधिनियम 2026 के तहत वैधानिक अधिकार मिलेंगे। यह वही SPV मॉडल है जो दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर के धोलेरा (गुजरात) और उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी में सफल रहा है, जहां अमूल जैसे बड़े निवेशक आए हैं।

07 जिलों को सीधा फायदा

जबलपुर में पर्यटन, इंजीनियरिंग, रक्षा-एयरोस्पेस और लॉजिस्टिक्स, नरसिंहपुर-रायसेन में फूड प्रोसेसिंग व वेयरहाउसिंग से किसानों को बेहतर दाम, भोपाल में आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, नॉलेज सर्विसेज, सीहोर-देवास में फूड प्रोसेसिंग, मैन्युफैक्चरिंग और इंदौर में एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग व इंदौर-देवास-पीथमपुर इकोसिस्टम से जुड़ाव होगा।

जमीन और पर्यावरण पर क्या

सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता शासकीय भूमि को दी जाएगी। निजी भूमि जरूरी हुई तो केवल सहमति से क्रय या कानून अनुसार मुआवजे और पुनर्वास के साथ अर्जन होगा। वन भूमि केवल वन संरक्षण कानून के तहत भारत सरकार की पूर्व स्वीकृति और क्षतिपूरक वनीकरण के बाद ही उपयोग होगी और हर हब का पर्यावरणीय-सामाजिक अध्ययन होगा। MPIDC प्रदेश भर में काम करता रहेगा।

यह है टाइमलाइन

30 दिन में कंपनी गठन, 6 माह में पूरे कॉरिडोर की GIS मैपिंग और लैंड बैंक, 12 माह में प्राथमिक हबों का मास्टर प्लान और DPR, उसके बाद निर्माण और भूमि आवंटन शुरू होगा। सरकार का संदेश है मध्यप्रदेश का युवा रोजगार के लिए बाहर न जाए, बल्कि देश-दुनिया के निवेशक मध्यप्रदेश आएं।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m