नोएडा. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मृत युवक अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक पुलिस और सिस्टम से मदद की गुहार लगाता रहा लेकिन किसी ने उसकी मदद नहीं की. पुलिस प्रशासन के सारे हाईटेक हथियार धरे के धरे रह गए और एक पिता के सामने देखते ही देखते उसका बेटा काल के गाल में समा गया. इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था. जांच जारी है. इस बीच जांच में नया मोड़ आया है. बताया जा रहा है कि अधिकारियों के बयान में विरोधाभास है.
SIT जांच अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास होने की बात सामने आ रही है. जानकारी के मुताबिक जांच अधिकारियों को मौके पर पहुंचने का समय गलत बताया गया है. पुलिस अफसरों पर आरोप है कि 31 दिसंबर को हुए इस ट्रक हादसे का संज्ञान इन्होंने नहीं लिया था.
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क्या है पूरा मामला
बता दें कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने से 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो गई थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट कि माने तो युवराज की मौत दम घुटने के कारण हुई. उनके फेफड़ों में काफी मात्रा में पानी भरा हुआ था. वहीं मृतक के पिता ने बताया कि वहां मौजूद एथारिटी के कर्मचारियों के पास रस्सी के अलावा कुछ नहीं था, जो रस्सी नीचे फेंक रहे थे वह वहां पहुंच नहीं पा रही थी. वहीं, बेटा बार बार कह रहा था बहुत नीचे जा रही है कार अब भी बचा लीजिए. अगर समय से बोट आ जाती तो बेटे की जान बच जाती, बेटा 2 घंटे तक जान बचाने की गुहार लगाता रहा.
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