राकेश चतुर्वेदी, भोपाल। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले के बहुचर्चित किरनापुर थाना कांड में एक दर्दनाक मोड़ सामने आया है। थाने में पुलिस अभिरक्षा के दौरान कथित दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकार हुई पीड़िता सावित्री चौधरी की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में उनका गर्भपात (अबॉर्शन) हो गया। शादी के करीब छह साल बाद मां बनने जा रही महिला के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्होंने इस हादसे के लिए किरनापुर पुलिस की कथित अमानवीयता और मारपीट को जिम्मेदार ठहराया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) की जांच रिपोर्ट के आधार पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

6 साल के इंतजार के बाद आई खुशी, पुलिसिया बर्बरता में छिनी

पीड़िता के पति कैलाश चौधरी और परिजनों ने बताया कि उनकी शादी वर्ष 2020 में हुई थी। लगभग छह साल के लंबे इंतजार के बाद महिला करीब दो महीने की गर्भवती हुई थी। परिजनों का आरोप है कि किरनापुर थाने में महिला और उसके पति के साथ कथित रूप से अमानवीय व्यवहार और मारपीट की गई, जिसके बाद से ही महिला की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी थी।22 सितंबर की शाम अत्यधिक रक्तस्राव और पेट दर्द की शिकायत के बाद महिला को जिला अस्पताल बालाघाट में भर्ती कराया गया। सोनोग्राफी और चिकित्सीय जांच में पाया गया कि गर्भस्थ शिशु की धड़कन बंद हो चुकी है। अधिक ब्लीडिंग होने के कारण डॉक्टरों को मजबूरी में गर्भपात की प्रक्रिया पूरी करनी पड़ी।

बीजेपी जिलाध्यक्ष और समाज ने की ‘भ्रूण हत्या’ का केस दर्ज करने की मांग

घटना की खबर मिलते ही मरार माली समाज के प्रदेश अध्यक्ष व भाजपा जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे जिला अस्पताल पहुंचे और पीड़िता व परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी। उन्होंने मामले पर गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित परिवार के साथ अन्याय हुआ है। समाज की ओर से आरोपी पुलिसकर्मियों पर ‘भ्रूण हत्या’ (Feticide) का आपराधिक प्रकरण दर्ज करने और कठोरतम कार्रवाई की मांग की जा रही है।

SIT जांच में खुली पोल: 4 पुलिसकर्मियों पर गिरी गाज

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस विभाग ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश भार्गव के अनुसार, जांच में महिला को अवैध रूप से थाने में बैठाकर रखने, गिरफ्तारी नियमों का उल्लंघन करने, रोजनामचे में प्रविष्टि में देरी और प्रक्रियात्मक अनियमितता बरटने के तथ्य सामने आए हैं। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर चार पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि मारपीट के प्रत्यक्ष साक्ष्य और गर्भपात के चिकित्सीय कारणों का आपस में क्या संबंध है, यह आने वाली मेडिकल रिपोर्ट और अग्रिम विवेचना के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगा।

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