पंकज श्रीवास्तव, छपरा। बिहार के सारण (छपरा) जिले में एक कलयुगी मां ने अपनी ही नवजात बच्ची को मौत के मुंह में धकेलने की नीयत से लगभग 50 फीट की ऊंचाई से नीचे फेंक दिया, लेकिन रेत पर गिरने के कारण मासूम की जान बाल-बाल बच गई।
जयप्रभा सेतु पर घटी घटना
यह पूरी घटना उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमाओं को आपस में जोड़ने वाले प्रमुख जयप्रभा सेतु पर अहले सुबह घटित हुई। पुलिस और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मंगलवार की सुबह किसी ममता को तार-तार करने वाली मां ने अपनी महज दो से तीन दिन की नवजात बच्ची को इस पुल के पाया नंबर 10 से सीधे नीचे सरयू नदी के किनारे फैली रेत पर फेंक दिया। इस घटना ने यह साबित कर दिया कि समाज में आज भी कुछ लोग अपनी जिम्मेदारियों से भागने के लिए कितने निचले स्तर तक गिर सकते हैं।

देवदूत बनकर सामने आए स्थानीय निवासी विकास डोम
कहावत बिल्कुल सच साबित होती है कि जाको राखे साइयां, मार सके ना कोय। जब उस मासूम बच्ची को इस दुनिया में कोई सहारा नहीं था, तब उसकी जिंदगी की डोर बचाने के लिए एक स्थानीय मसीहा सामने आया। मांझी निवासी विकास डोम सुबह के वक्त उसी सेतु से गुजर रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर नीचे सरयू नदी के तट पर स्थित रेत पर पड़ी।
रेत पर किसी बच्चे के रोने की धीमी आवाज सुनकर विकास तुरंत सतर्क हो गए और बिना एक पल गंवाए पुल से नीचे उतरे। जब उन्होंने पास जाकर देखा, तो उनके होश उड़ गए वहां एक नवजात बच्ची ठंड और दर्द से सिसक रही थी। विकास ने बिना देर किए अपनी सामाजिक जिम्मेदारी निभाई और तुरंत मांझी थाना पुलिस को इस पूरी घटना की सूचना दी।


खतरे से बाहर है मासूम
सूचना मिलते ही मांझी थाना पुलिस तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर बच्ची को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया। पुलिस के तुरंत सहयोग से नवजात को फौरन इलाज के लिए मांझी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में तैनात चिकित्सा अधिकारियों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बताया कि बच्ची का जन्म लगभग दो-तीन दिन पहले हुआ प्रतीत होता है। डॉक्टरों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया क्योंकि लगभग 50 फीट की अत्यधिक ऊंचाई से फेंके जाने के बावजूद, नीचे मुलायम रेत होने की वजह से बच्ची को कोई गंभीर अंदरूनी या बाहरी चोट नहीं आई है। वर्तमान में डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है और वह पूरी तरह खतरे से बाहर बताई जा रही है।
पुलिस कर रही है गहन जांच
इस घटना के सामने आने के बाद पूरे छपरा और मांझी क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। जिगर के टुकड़े को इस तरह बेसहारा छोड़ने वाली मां की ममता की लोग कड़ी निंदा कर रहे हैं और उसे जमकर कोस रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, सूझबूझ और तत्परता दिखाकर नवजात की जिंदगी बचाने वाले स्थानीय युवक विकास डोम और मांझी पुलिस की मुस्तैदी की हर तरफ सराहना हो रही है। फिलहाल, पुलिस इस बात का पता लगाने में जुटी है कि इस नवजात को यहां फेंकने वाली महिला कौन थी और इस घटना के पीछे की असल वजह क्या है।

