प्रतीक चौहान.  रायपुर. छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री को पारदर्शी बनाने के लिए  एनजीडीआरएस प्रणाली लागू की गई है. लेकिन अब यही प्रणाली लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है, यही कारण है कि जिन लोगों की रजिस्ट्री के बाद नामांतरण का काम अटका है उनका कहना है कि NGDRS प्रणाली पूरी तरह Fail… Fail…Fail साबित हो रही है.

इस नए सिस्टम की कई खामियां भी आ रही है. रजिस्ट्री कराने के बाद अपनी जमीन के नामांतरण कराने के लिए भटक रहे लोगों ने बताया कि उन्हें नामांतरण करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहे है और वे पटवारी से लेकर तहसील दफ्तरों के चक्कर लगा रहे है. दावा तो ये भी किया जा रहा है कि नए सिस्टम में 500 से अधिक ज्यादा रजिस्ट्रियों के नामांतरण अटके हुई हैं.

लल्लूराम डॉट कॉम ने ये मुद्दा 26 अप्रैल को भी प्रकाशित किया था. जिसमें ये प्रमुखता से बताया गया था कि  एनजीडीआरएस प्रणाली लागू होने के बाद से जिला प्रशासन का ये दावा है कि जमीन की रजिस्ट्री का कार्य आसान हो गया है. अब जमीन की  रजिस्ट्री कराने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ता है. लेकिन इसी प्रणाली के बाद नामांतरण का काम लेट हो गया है और लोगों को पटवारी के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ रहे है.

 जब रजिस्ट्रीधारक पटवारी दफ्तर पहुंच रहे है तो उन्हें ये बताया जाता है कि उनका नाम अभी सॉफ्टवेयर में नहीं दिखा रहा है, इसके लिए उन्हें थोड़ा इंतेजार करने पड़ेगा. लेकिन पटवारी कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद भी उनकी समस्या कम नहीं हो रही है. सूत्रों के मुताबिक रजिस्ट्री ऑफिस से दस्तावेज पूरी तरह अपलोड नहीं किया जा रहा है. जिसके कारण आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है. इसके अलावा इस सॉफ्टवेयर से जो परेशानी आ रही है वो ये है कि रजिस्ट्रीधारक का नाम अंग्रेजी में आ रहा है, जबकि रजिस्ट्री में नाम हिंदी में दर्ज होता है.

यही कारण है कि स्पेलिंग मिस्टेक होने के बाद उसे सुधारने का पॉवर एसडीएम के पास है और इसी के लिए लोग अपनी रजिस्ट्री में नाम सुधारने के लिए भी दर-दर भटक रहे है. वहीं इस परेशानी से गुजर रहे लोगों के मुताबिक जिस क्रम से रजिस्ट्री हो रही है उसी क्रम से दस्तावेज अपलोड नहीं हो रहे है. और हो भी रहे है तो आधे-अधूरे, जिससे समस्या पहले से काफी बढ़ गई है.

 एक पटवारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सॉफ्टवेयर में जाती के संबंध में भी जानकारी मांगी जा रही है, जो रजिस्ट्री में नहीं होती है. ऐसे में यदि किसी की आरक्षित वर्ग की जाति सामान्य हो जाती है तो वे पटवारियों पर पूरा दोष मढ़ रहे है, जिसके कारण पटवारी भी परेशान हो रहे है.