नालंदा। जिले NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) और एटीएस (ATS) ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय कारतूस तस्करी सिंडिकेट का पर्दाफाश किया है, जो ज्वेलरी दुकान और वैध गन हाउस की आड़ में मौत का सामान सप्लाई कर रहा था। जांच में सामने आया है कि हरियाणा का मास्टरमाइंड, उत्तर प्रदेश के कानपुर से गोलियां खरीदकर बिहार के अपराधी गिरोहों तक पहुंचा रहा था।
NIA की 9 घंटे तक चली मैराथन छापेमारी
सोमवार तड़के 3 बजे एनआईए की टीम ने नालंदा के बिहारशरीफ स्थित लहेरी मोहल्ले में धावा बोला। यह कार्रवाई ‘पीके गन हाउस’ और ‘रवि ज्वेलरी’ सहित कुल 6 ठिकानों पर की गई। करीब 9 घंटे तक चले इस ऑपरेशन में टीम ने भारी मात्रा में डिजिटल साक्ष्य, संदिग्ध दस्तावेज और डीवीआर (DVR) जब्त किए हैं।
सीएसपी (CSP) केंद्रों से होता था पैसों का लेनदेन
इस सिंडिकेट की सबसे चौंकाने वाली कड़ी ‘कस्टमर सर्विस पॉइंट’ (CSP) केंद्रों का इस्तेमाल है। गिरोह का मुख्य चेहरा सत्येंद्र सिंह, सीएसपी संचालक कुंदन के जरिए रुपयों का ट्रांजैक्शन करता था। गिरफ्तारी से बचने के लिए सत्येंद्र अपने रिश्तेदारों के बैंक खातों का उपयोग कर रहा था। तकनीकी जांच में खुलासा हुआ कि गिरफ्तार तस्कर मोहम्मद परवेज तक पैसे पहुंचाने के लिए इन्हीं डिजिटल रास्तों का इस्तेमाल किया गया।
कानपुर से खरीद और हरियाणा से कंट्रोल
- यह गिरोह केवल स्थानीय स्तर पर सीमित नहीं है। नेटवर्क के तार यूपी और हरियाणा से जुड़े हैं:
- सप्लाई: यूपी के कानपुर स्थित लाइसेंसी गन हाउसों से अवैध तरीके से कारतूस खरीदे जाते थे।
- कंट्रोल: हरियाणा के कुरुक्षेत्र से इस पूरे सिंडिकेट की फंडिंग और रसद की निगरानी की जाती थी।
- बरामदगी: बीते कुछ महीनों में इस नेटवर्क से जुड़े ठिकानों से करीब 2500 कारतूस बरामद हुए हैं, जिनमें एके-47 जैसी घातक राइफलों की गोलियां भी शामिल हैं।
मास्टरमाइंड की तलाश और अब तक की गिरफ्तारियां
सिंडिकेट का मुख्य मोहरा सत्येंद्र सिंह एक शातिर अपराधी है, जो 2001 और 2009 में भी अवैध हथियारों के साथ पकड़ा जा चुका है। हालांकि वह अभी फरार है, लेकिन एनआईए ने हरियाणा से विजय और कुश कालरा, और बिहार से शशि व रविरंजन जैसे बड़े चेहरों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। अब जांच एजेंसियां उन गिरोहों की तलाश कर रही हैं, जिन्होंने इन घातक गोलियों की खेप खरीदी थी।
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