पटना। बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं और आगामी 30 मार्च को वह बिहार विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे सकते हैं। 16 मार्च को राज्यसभा निर्वाचन का सर्टिफिकेट मिलने के बाद अब उनके पास केवल 14 दिनों का समय है। संवैधानिक नियमों के अनुसार, यदि वे इस अवधि के भीतर अपनी पुरानी सदस्यता नहीं छोड़ते, तो उनकी राज्यसभा की सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाएगी।

​संजय झा ने दी जानकारी

​जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने इस खबर की पुष्टि करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री संवैधानिक बाध्यताओं का सम्मान करते हुए समय सीमा के भीतर निर्णय लेंगे। उन्होंने नीतीश कुमार के विजन की सराहना करते हुए कहा कि 2005 में उन्होंने न्याय यात्रा की थी और अब समृद्धि यात्रा के माध्यम से वे राज्य के विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं।

​ईरान संकट और केंद्र की विदेश नीति

​अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर चर्चा करते हुए संजय झा ने ईरान युद्ध और बढ़ती तेल कीमतों पर केंद्र सरकार के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि सर्वदलीय बैठक में सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बावजूद भारत ने पेट्रोलियम सरचार्ज घटाकर कीमतों को स्थिर रखा है, जो एक सराहनीय कदम है।

​बिहार की कानून व्यवस्था पर विपक्ष को जवाब

​विपक्ष द्वारा कानून व्यवस्था पर उठाए जा रहे सवालों को खारिज करते हुए झा ने कहा कि बिहार में लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति देश में सबसे बेहतर है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कड़ी कार्रवाई की जा रही है और राजद द्वारा फैलाए जा रहे दावों में कोई सच्चाई नहीं है।

​नितिन नबीन भी छोड़ेंगे विधानसभा की सदस्यता

​नीतीश कुमार के अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन को भी बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देना होगा, क्योंकि वे भी राज्यसभा के लिए चुने गए हैं। गौरतलब है कि इस बार बिहार से एनडीए कोटे के सभी पांच उम्मीदवार राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं।