पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. हालांकि इन चुनावों के लिए अभी काफी समय है. लेकिन इससे पहले ही सियासी सरगर्मी तेज हो चली है. सूबे की सीएम ममता बनर्जी लगातार केंद्र सरकार पर कई तरह के गंभीर आरोप लगा रही हैं. तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग को भी निशाना बनाने से नहीं चूक रही हैं. उन्होंने चुनाव पर्यवेक्षकों की नियुक्ति पर भी अपना विरोध जताया था. इसके साथ ही सरकार ने चुनाव आयोग (ECI) से 9 IAS अधिकारियों को सेंट्रल ऑब्जर्वर ड्यूटी से छूट देने की मांग की थी.

राज्य सरकार की तरफ से प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सुचारु प्रशासनिक कामकाज बनाए रखने के लिए इन अधिकारियों को बंगाल में ही रखने की मांग की है. ECI ने 15 IAS अफसरों की सूची जारी की थी, जिस पर राज्य ने आपत्ति जताई और वैकल्पिक नाम भी सुझाए हैं. जिनमें राज्य के गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना भी शामिल हैं.

राज्य सरकार ने चुनाव वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में सेंट्रल ऑब्जर्वर के तौर पर नियुक्त किए जाने से छूट देने का अपील भी की है.

कौन-कौन है सूची में शामिल?

गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना के अलावा, सूची में शामिल अन्य IAS अधिकारियों में अश्विनी कुमार यादव, पीबी सलीम, अवनींद्र सिंह, सौमित्र मोहन, स्मारकी महापात्रा, अर्चना, संजय बंसल, पी मोहन गांधी, शुभंजन दास, पी उलगनाथन, सौरभ पहाड़ी, रचना भगत, रितेंद्र नारायण बसु रॉय चौधरी और राजनवीर सिंह कपूर शामिल थे.

इसके साथ ही राज्य ने IAS अधिकारियों संजय बंसल, पी मोहन गांधी, अवनींद्र सिंह, सौमित्र मोहन, शुभंजन दास, पीबी सलीम, रचना भगत और पी उलगानाथन को भी ड्यूटी से मुक्त करने का अनुरोध किया है.

सरकार ने क्या की आयोग से मांग?

राज्य सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुचारू प्रशासनिक कामकाज सुनिश्चित रखने की बात कही है. सरकार ने कहा कि इसमें आने वाली चुनौतियों को देखते हुए इन अधिकारियों को कहीं और चुनावी ड्यूटी पर भेजने के बजाय राज्य में ही तैनात रखने का अनुरोध किया है. शीर्ष चुनाव निकाय ने बुधवार को बंगाल के 15 IAS और 10 IPS अधिकारियों की एक सूची जारी की थी, जिन्हें चुनाव वाले राज्यों में सेंट्रल ऑब्जर्वर के तौर पर तैनात किया जाना है.

राज्य सरकार की तरफ से भले ही नाम दिए गए हों. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया था कि उसने कई बार राज्य सरकार से नाम मांगे थे. इसके बाद भी सरकार ने नाम नहीं दिए थे. इसके बाद आयोग की तरफ से नाम सुझाए गए हैं.

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