कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। चॉकलेट भला किसे पसंद नहीं होती है। इसका नाम लेते ही ज्यादातर लोगों के मुंह में पानी आ जाता है। और जब चॉकलेट टेस्टी होने के साथ हेल्दी हो जाए तो इसका स्वाद और ज्यादा बढ़ जाता है। जीवाजी यूनिवर्सिटी ( Jiwaji University) की फूड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट ने प्रो बायोटिक डार्क चॉकलेट (pro biotic dark chocolate) बनाई है जो सेहत का खजाना है। एमएससी थर्ड सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही छात्रा चांदनी रॉय ने इसे तैयार किया है। 

इसे भी पढ़ेः रूस-यूक्रेन संकटः यूक्रेन में फंसे इंदौर के 60 स्टूडेंट्स, वीडियो जारी कर बोले- हम सुरक्षित, लेकिन घर वापसी की चिंता 

यह चॉकलेट शुगर पाचन संबंधी समस्याओं के अलावा अन्य गंभीर बीमारियों में संजीवनी की तरह काम करती है। विशेषकर बच्चो के लिए सबसे ज्यादा कारगर बताया गया हैं। फूड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट के एचओडी प्रोफेसर जीबीकेएस प्रसाद और प्रो निधि गोस्वामी के मार्गदर्शन में इसे तैयार कराया गया है। इस प्रोजेक्ट का प्लान डिपार्टमेंट से एमएससी थर्ड सेमेस्टर की पढ़ाई कर रही छात्रा चांदनी रॉय ने तैयार किया। और इसे दोनो प्रोफेसर की मदद से लेबोरेटरी में बनाया।

 

इसे भी पढ़ेः आंखफोड़वा कांडः 67 लोगों की आंखों की रोशनी छीनने वाले डॉक्टर की सरकार ने पेंशन रोकी, 7 साल पहले अंधत्व निवारण शिविर में बुजुर्गों को कर दिया था अंधा

क्या होता है प्रो-बायोटिक,इससे कैसे मिलता है लाभ?

प्रोबायोटिक एक नेचुरल सप्लीमेंट्स होते है, जो शरीर के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। यह अन्य आर्टिफिशियल सप्लीमेंट की तरह शरीर के ऑर्गन्स पर नकारात्मक प्रभाव नहीं डालते हैं। यही कारण है कि प्रोबायोटिक चॉकलेट के सेवन से शरीर में बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियों को संतुलित किया जा सकता है यह चॉकलेट आंतों को मजबूत करने में सहायता करती है। जिससे पाचन प्रक्रिया संतुलित हो जाती है और व्यक्ति को भूख भी अच्छी लगने लगती है जिससे उसके शरीर की कार्यप्रणाली सीधे तौर पर पॉजिटिव हो जाती है और शरीर के अंदर के फैट को कंट्रोल करते हुए एक निरोगी काया प्रदान करती है। इस प्रोबायोटिक डार्क चॉकलेट को तैयार करने के लिए इसका क्वालिटेटिव और क्वांटिटेटिव एनालिसिस किया जाता है और इस बता पर निगरानी रखी जाती है कि तैयार करने के दौरान सभी कंटेंट उचित मात्रा में मिलाए गए हैं या नही। इसे तैयार करने के लिए मिल्क पाउडर और कोको पाउडर को मिक्स करके कुछ देर रखा जाता है इसके बाद सामान्य बटर मिक्स करते हुए थोड़ी देर बाद इस मिक्चर में प्रोबायोटिक मिलाए जाते हैं इस मिश्रण को 1:30 से 2 घंटे तक मोल्ड में डाल कर रखा जाता है जिसके बाद तैयार हो जाती है सेहत के खजाने से भरी हुई प्रोबायोटेक डार्क चॉकलेट।

इसे भी पढ़ेः बेटी का मजाक उड़ाया तो पापा ने युवक को मार दी गोली, बच्ची को ‘डबल बैट्री’ कहने पर भड़के परिजन ने कट्टे से मारी गोली

फूड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट में बहुत सी रिसर्च जारी 

गौरतलब है कि जीवाजी विश्वविद्यालय के फूड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट ( Food Technology Department of Jiwaji University) के अनुसार विभाग में अन्य बहुत सी रिसर्च जारी है। वर्तमान समय में यदि कोई इस प्रोबायोटिक डार्क चॉकलेट के जरिए स्टार्टअप शुरू करना चाहता है तो उसके लिए संस्थान की ओर से ट्रेनिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी, क्योंकि इसका मार्केट में अच्छा व्यवसाय खड़ा किया जा सकता है। इससे  एक नया स्टार्टअप शुरू होते हुए खुद के साथ दूसरे अन्य लोगों को भी रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।

इसे भी पढ़ेः MP Board Exam 2022: 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षा को लेकर भोपाल में 17 फरवरी से 12 मार्च तक लागू रहेगी धारा-144, भोपाल में 104 केंद्रों पर होंगे एग्जाम 

Read more- Health Ministry Deploys an Expert Team to Kerala to Take Stock of Zika Virus