Odisha Tableau Republic Day 2026: नई दिल्ली. 77वें गणतंत्र दिवस परेड में ओडिशा की झांकी ने “मिट्टी से सिलिकॉन: परंपरा में निहित, इनोवेशन के साथ आगे बढ़ते हुए” थीम के तहत खेती की विरासत से इनोवेशन आधारित विकास तक की शानदार कहानी पेश की.
Also Read This: प्यार की मिसाल: बुजुर्ग ने बीमार पत्नी को 600 KM रिक्शा खींचकर पहुंचाया अस्पताल, कबाड़ बीनकर कराया इलाज

Also Read This: बड़बिल बैंक डकैती का खुलासा, धनबाद से दो मास्टरमाइंड गिरफ्तार
झांकी के सामने वाले हिस्से में महिलाओं के नेतृत्व वाली समावेशी भागीदारी को दिखाया गया. यह स्थायी आत्मनिर्भरता की नींव के रूप में सशक्तिकरण का प्रतीक था. बीच में हाथ में सेमीकंडक्टर चिप दिखाई गई, जो ओडिशा के टेक्नोलॉजी, डिजिटल क्षमता और कुशल मानव संसाधन के केंद्र के रूप में उभरने को दर्शाती है.
आधुनिक सोच को दर्शाते हुए झांकी में कोरापुट कॉफी को भी दिखाया गया. यह स्थायी आजीविका और आदिवासी सशक्तिकरण का प्रतीक है. हथकरघा बुनाई और हस्तशिल्प के लाइव प्रदर्शन ने ओडिशा की कारीगर अर्थव्यवस्था की मजबूती और पारंपरिक कौशल के संरक्षण को उजागर किया.
Also Read This: पद्म श्री 2026: ओडिशा की तीन जानी-मानी हस्तियों को सम्मानित किए जाने की संभावना
झांकी के पीछे कोणार्क सूर्य मंदिर की प्रतिकृति दिखाई गई, जो ओडिशा की प्राचीन और गौरवशाली विरासत को दर्शाती है. किनारों पर पट्टचित्र पेंटिंग, आदिवासी कला, चांदी की फिलीग्री डिजाइन और जगन्नाथ रथ का पहिया राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को दिखा रहे थे.
कार्यक्रम में रंग भरते हुए नर्तकियों ने 16वीं सदी का लोक नृत्य चैती घोड़ा प्रस्तुत किया. यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ओडिशा के निरंतर योगदान को दर्शाता है. इस प्रतीकात्मक प्रस्तुति के जरिए ओडिशा ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर परंपरा और इनोवेशन को जोड़ते हुए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता दिखाई.
Also Read This: महिमा संतों ने ओडिशा के मुख्यमंत्री माझी से की मुलाकात, जोरांदा माघ मेला 2026 का दिया न्योता
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें





