Padma Shri 2026: भुवनेश्वर. 25 जनवरी 2026 को आई रिपोर्ट्स के अनुसार, ओडिशा के प्रसिद्ध संथाली लेखक और सांस्कृतिक कार्यकर्ता चरण हेम्ब्रम को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में पद्म श्री 2026 से सम्मानित किया जा सकता है. पिछले तीन दशकों से संथाली भाषा और आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और प्रचार में उनके योगदान के लिए उन्हें “अनसंग हीरोज” श्रेणी में चुने जाने की संभावना है.
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चरण हेम्ब्रम के कार्यों ने स्वदेशी साहित्य को मजबूत किया है और संथाली भाषा व संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई है. उन्हें अक्सर “संथाली भाषा का प्रहरी” कहा जाता है. उन्होंने संथाली भाषा में कई किताबें, नाटक और गीत लिखे हैं. उनकी रचनाओं में आदिवासी जीवन, परंपराएं और सामाजिक सच्चाई साफ झलकती है.
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साहित्य के साथ-साथ हेम्ब्रम ने आदिवासी सांस्कृतिक शिक्षा से जुड़े कई संस्थानों की स्थापना भी की है. उन्होंने पारंपरिक नृत्य कलाओं को बढ़ावा दिया और महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित किया, जिससे सांस्कृतिक संरक्षण और सशक्तिकरण को बल मिला.
साल 2019 में उन्हें उनकी लघु कथा संग्रह ‘सिसिरजली’ के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. बताया जा रहा है कि चरण हेम्ब्रम उन कम से कम तीन लोगों में शामिल हैं, जिन्हें पद्म श्री 2026 के लिए “अनसंग हीरोज” श्रेणी में चुना गया है. अन्य संभावित सम्मानित व्यक्तियों में शामिल हैं.
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महेंद्र कुमार मिश्रा, जो एक जाने-माने भाषाविद और लोककथाकार हैं. उन्हें आदिवासी मिथकों, महाकाव्यों और मौखिक परंपराओं के दस्तावेजीकरण के लिए पहचाना गया है. सिमांचल पात्रो, प्रसिद्ध सखी नाट लोक रंगमंच कलाकार हैं. उन्हें लोक थिएटर और मंच कला में आजीवन योगदान के लिए सम्मानित किया जा सकता है.
इन हस्तियों का चयन ओडिशा की समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को दर्शाता है और आदिवासी ज्ञान व कला परंपराओं के संरक्षण के प्रयासों को सम्मान देता है.

