अनिल मालवीय, सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में विजयादशमी (दशहरे) का पर्व एक अनोखे और तीखे विरोध प्रदर्शन का गवाह बनने जा रहा है। जिले में बिजली कंपनी के अधिकारियों की कथित लापरवाही और उदासीनता के खिलाफ आक्रोशित किसान पारंपरिक रावण के बजाय बिजली विभाग के अधिकारियों के घमंड के प्रतीक रूप में रावण का पुतला दहन करेंगे। किसान एवं समाजसेवी एमएस मेवाड़ा के नेतृत्व में आयोजित होने वाले इस प्रदर्शन में रावण के 10 सिरों पर विभाग से जुड़े 10 मुख्य सवाल और मांगें लिखी गई हैं।

क्यों हो रहा है अनोखा प्रदर्शन?

किसानों का मुख्य आरोप है कि खेतों के ऊपर से गुजर रहे और नीचे झूल रहे 11 केवी के खतरनाक बिजली के तारों को लेकर लगातार शिकायतें की गईं, लेकिन विद्युत मंडल के अधिकारियों ने समय रहते कोई सुधार कार्य नहीं किया। इस घोर लापरवाही के चलते कई किसानों को करंट लग चुका है, जिसमें कुछेक की जान चली गई है तो कई गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पीड़ित किसान न्याय की मांग को लेकर पिछले चार महीने से अधिक समय से सीहोर से लेकर भोपाल तक धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं। इसके बावजूद जब जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो किसानों ने दशहरे के पावन पर्व पर अनूठे तरीके से विरोध जताने का फैसला किया है।

किसानों के मुख्य सवाल और मांगें

दशहरा दहन के दौरान जलाए जाने वाले रावण के 10 सिरों के माध्यम से शासन-प्रशासन के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें और सवाल रखे जाएंगे। करंट लगने से गंभीर रूप से घायल किसान सतीश मेवाड़ा (ग्राम बड़बेली) को 25 लाख रुपये का मुआवजा और एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए। करंट की चपेट में आकर जान गंवाने वाली किसान महिला सुगंध बाई (ग्राम मोहडिया) के पुत्र को उचित मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए।

झूलते तारों से निजात और जिम्मेदारों पर एफआईआर

खेतों से लेकर गांवों तक मौत बनकर झूल रहे हाई-टेन्शन बिजली के तारों को तत्काल दुरुस्त किया जाए। लापरवाही बरतने वाले दोषी अधीक्षण यंत्री (SE), कार्यपालन यंत्री (EE) और सहायक यंत्री (AEE) के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए। किसानों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले अमले की जवाबदेही तय की जाए।

जब तक न्याय नहीं, जारी रहेगा आंदोलन

किसान नेता एमएस मेवाड़ा ने दो टूक शब्दों में कहा कि यह पुतला दहन महज एक प्रतीकात्मक विरोध नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से शासन-प्रशासन तक किसानों का गहरा रोष पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने चेताया है कि जब तक पीड़ित परिवारों को पूरा न्याय नहीं मिल जाता और लापरवाह अधिकारियों पर गाज नहीं गिरती, तब तक किसानों का यह संघर्ष और आंदोलन लगातार जारी रहेगा।

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