Dharm Desk – दशहरा यानी विजयादशमी को लेकर इस साल लोगों के मन में तारीख को लेकर सवाल है। कोई 20 अक्टूबर को पर्व मनाने की बात कर रहा है, तो कहीं 21 अक्टूबर की तारीख को सही बता रहा है। ऐसे में सवाल है कि रावण दहन कब किया जाएगा और इसके लिए कौन-सा समय उचित होने वाला है। हिंदू पंचांग के अनुसार, देश के अधिकतर हिस्सों में विजयादशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। इसी दिन शाम को रावण दहन की परंपरा निभाई जाएगी। हालांकि, बंगाल में दुर्गा पूजा की परंपराओं के अनुसार विजयादशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।

रावण दहन कब किया जाएगा
दशहरे पर रावण दहन भगवान श्रीराम की लंकापति रावण पर विजय की याद में किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में रावण दहन करना शुभ माना जाता है। इस साल उत्तर भारत समेत देश के अधिकतर क्षेत्रों में 20 अक्टूबर की शाम को रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। रावण दहन का कोई एक समय पूरे देश के लिए निर्धारित नहीं है। अलग-अलग शहरों में स्थानीय पंचांग, सूर्यास्त और आयोजन की व्यवस्था के अनुसार समय तय किया जा सकता है। इसलिए रावण दहन देखने जाने से पहले अपने श हर की रामलीला समिति या स्थानीय आयोजन की समय-सारिणी जरूर जांच लें। कई स्थानों पर रावण के साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का भी दहन होने वाला है।
विजयादशमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के मुताबिक, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 12.50 बजे से शुरू होगी और 21 अक्टूबर को दोपहर 2.11 बजे पर समाप्त होगी। दशमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण कुछ क्षेत्रों में पर्व की तारीख अलग हो सकती है। पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1.59 बजे से 2.45 बजे तक रहेगा। इस दौरान शस्त्र पूजन, शमी वृक्ष, अपराजिता पूजा और अन्य पारंपरिक अनुष्ठान किए जा सकते है। ध्यान रखें कि विजय मुहूर्त और रावण दहन का समय अलग-अलग होता है। रावण दहन सामान्यतः शाम को किया जाता है।
दशहरा क्यों मनाया जाता है
पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीराम ने रावण का वध कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया था। वहीं, यह पर्व मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी जुड़ा है। इसी वजह से विजयादशमी को साहस, सत्य और धर्म की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन लोग भगवान श्रीराम और मां दुर्गा की पूजा करते है। कई जगह शमी पूजन, शस्त्र पूजन और नए कार्य की शुरुआत करने की परंपरा भी है । दशहरा केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि यह याद दिलाने वाला पर्व भी है कि कठिन परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

