जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (JNUSU) ने आरोप लगाया कि अपने पदाधिकारियों और छात्र कार्यकर्ताओं को चुप कराने और डराने के उद्देश्य से जेएनयू प्रशासन ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। छात्र संघ का कहना है कि यह एफआईआर विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में निगरानी व्यवस्था के विरोध के दौरान दर्ज कराई गई है। JNUSU के अनुसार, एफआईआर में वर्तमान पदाधिकारियों के साथ-साथ एक पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष का भी नाम शामिल किया गया है। छात्र संघ ने आरोप लगाया कि प्रशासन असहमति की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहा है और छात्रों के लोकतांत्रिक विरोध को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है। JNUSU ने इस कार्रवाई को छात्र आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास बताया है।

जेएनयूएसयू ने कहा कि विश्वविद्यालय का बी.आर. अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय लंबे समय से निधि में कटौती और प्रशासनिक उदासीनता का शिकार है, जिसके कारण उसकी स्थिति दयनीय बनी हुई है। छात्र संघ के अनुसार, वर्षों से छात्र अधिक पुस्तकों की उपलब्धता, बैठने की क्षमता बढ़ाने और पुस्तकालय के खुलने के समय में विस्तार की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन इन बुनियादी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया।

प्रशासन ने गुपचुप तरीके से गेट लगवाया

छात्र संघ के अनुसार, पिछले साल अगस्त में प्रशासन ने गुपचुप तरीके से लाइब्रेरी में ये निगरानी गेट लगवा दिए थे। इसके विरोध में तत्कालीन JNUSU अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव और बड़ी संख्या में छात्रों ने प्रदर्शन किया था, जिसके बाद प्रशासन को निगरानी उपकरण हटाने के लिए मजबूर होना पड़ा। JNUSU ने कहा कि अब उसी मुद्दे को उठाने पर एफआईआर दर्ज कराना छात्र आवाज को दबाने की कोशिश है। छात्र संघ ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताते हुए एफआईआर वापस लेने और लाइब्रेरी से जुड़े शैक्षणिक मुद्दों पर ध्यान देने की मांग की है।

स्वतंत्र समिति का गठन

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने आरोप लगाया है कि छात्रों की आवाज दबाने और निर्वाचित प्रतिनिधियों को डराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय प्रशासन ने जेएनयू लाइब्रेरी में निगरानी व्यवस्था के विरोध को लेकर जेएनयूएसयू पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।

जेएनयूएसयू का कहना है कि धन की कमी और प्रशासनिक उदासीनता के कारण बी.आर. अंबेडकर केंद्रीय पुस्तकालय की स्थिति वर्षों से खराब है। छात्र लगातार अधिक पुस्तकों, बैठने की क्षमता बढ़ाने और लाइब्रेरी के समय विस्तार की मांग करते रहे हैं, लेकिन इन मांगों को नजरअंदाज कर प्रशासन ने चेहरे की पहचान करने वाले कैमरे और चुंबकीय गेट लगाने पर संसाधन खर्च किए।

छात्र संघ के अनुसार, अगस्त 2025 में गुपचुप तरीके से लगाए गए इन गेटों को छात्र विरोध के बाद हटाना पड़ा था और प्रशासन ने आश्वासन दिया था कि आगे कोई कदम छात्रों की भागीदारी वाली स्वतंत्र समिति के बिना नहीं उठाया जाएगा। हालांकि, जेएनयूएसयू चुनावों के दौरान नवंबर 2025 में प्रशासन ने अपने ही आश्वासन को तोड़ते हुए दोबारा चुंबकीय गेट लगवा दिए, जिसके खिलाफ नव निर्वाचित छात्र संघ ने फिर विरोध दर्ज कराया।

जेएनयूएसयू के अनुसार, प्रशासन ने पहले आश्वासन दिया था कि छात्रों के प्रतिनिधित्व वाली समिति बनाए बिना कोई निगरानी व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी, लेकिन नवंबर 2025 में छात्रसंघ चुनावों के दौरान चुपचाप चुंबकीय गेट दोबारा लगा दिए गए। इसके विरोध में प्रदर्शन करने पर प्रशासन ने जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति, उपाध्यक्ष गोपिका, महासचिव सुनील, संयुक्त सचिव दानिश और पूर्व अध्यक्ष नीतीश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। अब दिल्ली पुलिस ने एफआईआर के आधार पर सभी को जांच नोटिस भेजा है। जेएनयूएसयू ने इसे छात्र आंदोलनों पर हमला बताते हुए सभी मामलों को तुरंत वापस लेने की मांग की है।

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