Padmanabh Singh Succession Certificate Case: जयपुर के जिला न्यायालय, महानगर प्रथम ने पूर्व राजपरिवार के सदस्य पद्मनाभ सिंह को साल 2019 में जारी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र को चुनौती देने वाले मामले में अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने उर्वशी देवी के दावे को समय-सीमा से बाहर बताने वाली पद्मनाभ सिंह की अर्जी खारिज कर दी। पीठासीन अधिकारी दिनेश त्यागी ने कहा कि उर्वशी देवी का दावा परिसीमा अवधि से बाधित नहीं है।

2011 में शुरू हुआ था उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का विवाद

उर्वशी देवी की ओर से अधिवक्ता रामजी लाल गुप्ता ने अदालत को बताया कि पद्मनाभ सिंह ने साल 2011 में उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी करने की मांग को लेकर दावा पेश किया था। उर्वशी देवी ने इसका विरोध करते हुए कहा था कि इसमें उनसे जुड़े हिंदू अविभाजित परिवार (HUF) के शेयर भी शामिल कर लिए गए हैं। इसके बाद पद्मनाभ सिंह की ओर से इन शेयरों को हटाने पर सहमति दी गई। अदालत ने शेष शेयरों के लिए उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी कर दिया।

2019 में जारी प्रमाण पत्र को दी चुनौती

उर्वशी देवी के अनुसार, बाद में पद्मनाभ सिंह ने उन्हें पक्षकार बनाए बिना एक और दावा पेश किया। इसके आधार पर साल 2019 में उनसे जुड़े शेयरों के लिए भी उत्तराधिकार प्रमाण पत्र हासिल कर लिया गया। उर्वशी देवी ने इस प्रमाण पत्र को चुनौती देते हुए अदालत में दावा दायर किया। उन्होंने मांग की कि उन्हें पक्षकार बनाए बिना जारी किए गए प्रमाण पत्र को वापस लिया जाए।

पद्मनाभ सिंह की ओर से उठाया गया समय-सीमा का सवाल

पद्मनाभ सिंह की ओर से इस दावे को चुनौती देते हुए कहा गया कि उत्तराधिकार प्रमाण पत्र मई 2019 में जारी हुआ था, जबकि उर्वशी देवी ने अपना दावा साल 2024 में पेश किया। उनके पक्ष की दलील थी कि जिन मामलों में कानून में अलग समय-सीमा तय नहीं है, वहां तीन साल की अवधि लागू होती है। इसी आधार पर दावा दो साल की देरी से दाखिल होने की बात कही गई। पद्मनाभ सिंह की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया कि इस पर सुनवाई नहीं की जाए।

हाईकोर्ट में याचिका का दिया गया हवाला

इसके जवाब में उर्वशी देवी ने कहा कि उत्तराधिकार प्रमाण पत्र जारी होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। बाद में निचली अदालत में दावा पेश करने की छूट मांगते हुए याचिका वापस ली गई थी। उर्वशी देवी की ओर से इसी घटनाक्रम के आधार पर दलील दी गई कि उनके दावे को निर्धारित समय-सीमा के बाद दाखिल हुआ नहीं माना जा सकता। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला न्यायालय, महानगर प्रथम ने पद्मनाभ सिंह की अर्जी खारिज कर दी। अदालत ने माना कि उर्वशी देवी का दावा परिसीमा अवधि से बाधित नहीं है।

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