Panchkula School Case : पंचकूला। स्कूल में 6 साल की बच्ची के साथ हुई क्रूरता के मामले में आज यानी 3 नवंबर को अहम फैसला हो सकता है। आठ साल के बच्चे की ब्रेन मैपिंग रिपोर्ट सामने आने के बाद उसे दोबारा जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया जाएगा। बोर्ड ही तय करेगा कि बच्चे को अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाए या उसे जमानत दी जाए।

सोमवार को चंडीगस बाल सुधार गृह भेज दिया गया। अब मंगलवार को रिपोर्ट आने की उम्मीद है। इसके आधार पर जांच की अगली दिशा तय की जाएगी।

स्कूल से जल्दी घर लौट जाता था बच्चा

जांच में यह बात भी सामने आई है कि बढ़ के सेक्टर-32 स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बच्चे की ब्रेन मैपिंग कराई गई थी। जांच के बाद शाम करीब 6 बजे उसे वापच्चा स्कूल में ज्यादा देर नहीं रुकता था। वह कुछ समय स्कूल में बिताने के बाद घर लौट जाता था। उसका घर स्कूल के पास ही बताया गया है।

अब जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि बच्चा स्कूल से कब और कैसे घर जाता था। उसकी गैरमौजूदगी पर स्कूल स्टाफ ने ध्यान क्यों नहीं दिया और घटना वाले दिन उसकी गतिविधियां क्या थीं। अंबाला में काउंसलिंग और पूछताछ के दौरान इन पहलुओं को समझने की कोशिश होगी।

बच्ची की हालत में सुधार, पिता ने मांगा मुआवजा

घायल बच्ची का चंडीगढ़ पीजीआई में इलाज चल रहा है। परिवार के मुताबिक, उसकी तबीयत में पहले से काफी सुधार हुआ है। बच्ची के पिता ने उसके इलाज, पढ़ाई और भविष्य को ध्यान में रखते हुए उचित मुआवजे की मांग की है।

उनका कहना है कि बच्ची अभी बहुत छोटी है। ऐसे में उसके बेहतर भविष्य और शिक्षा के लिए आर्थिक मदद जरूरी है।

स्कूल प्रबंधन और स्टाफ की भूमिका भी जांच के घेरे में

घटना के बाद शिक्षा विभाग समेत तीन अलग-अलग समितियां मामले की जांच कर रही हैं। स्कूल की प्रिंसिपल नीलू और दो महिला शिक्षकों को निलंबित किया जा चुका है।

सोमवार को खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) की अध्यक्षता वाली टीम ने स्कूल में करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान प्रिंसिपल, दोनों निलंबित शिक्षकों और स्कूल के अन्य स्टाफ से सवाल किए गए।

CCTV से लेकर बंद क्लासरूम तक, जांच टीम उठा रही सवाल

जांच समिति स्कूल में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था की खामियों को भी परख रही है। टीम यह जानना चाहती है कि घटना के समय स्कूल में कितने कर्मचारी और बच्चे मौजूद थे। संबंधित कक्षा में कौन-सा शिक्षक तैनात था और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी कैसे की जा रही थी।

जांच में यह सवाल भी उठाया गया है कि बच्ची के स्कूल से बाहर जाने के समय प्रिंसिपल मौजूद थीं या नहीं। जब सीसीटीवी फुटेज देखने की व्यवस्था प्रिंसिपल के कमरे में थी, तो समय रहते फुटेज क्यों नहीं देखे गए।

इसके अलावा दोपहर की शिफ्ट में छोटी कक्षाओं के बच्चे स्कूल में रहते हैं, तो पहली मंजिल पर 12वीं कक्षा का कमरा खुला क्यों था। चौकीदार ने क्लासरूम का दरवाजा बंद करते समय अंदर जाकर जांच क्यों नहीं की, यह भी जांच का हिस्सा है।

समिति की रिपोर्ट आने के बाद स्कूल के दूसरे कर्मचारियों की भूमिका और उन पर संभावित कार्रवाई को लेकर फैसला हो सकता है। फिलहाल आज जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के फैसले और ब्रेन मैपिंग रिपोर्ट पर सबकी नजर है।

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