मानसा. मानसा में नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के मामले की जांच कर रही सीबीआई की टीम अब उस नेटवर्क की तलाश में है जो नशीली दवाओं की आपूर्ति करने में लगा था. सूत्रों के अनुसार, मोहाली और कुराली स्थित दो दवा फैक्ट्रियां जांच एजेंसी के रडार पर हैं.

मामले के आरोपी मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार ने पुलिस पूछताछ में दवाओं की खेप मोहाली से मंगवाने की बात स्वीकार की है, इसके बाद ही जांच उस दिशा में की जा रही है. अब इन फैक्ट्रियों में दवाओं के उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है. सूत्रों का दावा है कि इन फैक्ट्रियों से मानसा में नशीली दवाओं की आपूर्ति होती थी. सीबीआई यह पता लगाने में जुटी है कि दवाएं किन माध्यमों से मानसा पहुंचती थीं और इस नेटवर्क में किन लोगों की भूमिका थी.

रिकार्ड मंगवाने की तैयारी पर

सीबीआई फैक्टरी संचालकों और उनके साझेदारों से उत्पादन और बिक्री का रिकॉर्ड मांग सकती है. ध्यान देने वाली बात यह है कि कितनी दवाओं का उत्पादन हुआ, उनकी आपूर्ति किन वितरकों और मेडिकल स्टोरों को की गई और बिक्री के लिए कौन-से बिल जारी किए गए. इससे नियमों के उल्लंघन के जरिए दवाओं की आपूर्ति किए जाने का पता लगाने में मदद मिल सकती है. इसके साथ आरोपी के अलावा और कहां कहां दवाई भेजी जाती थी ये भी पता चलेगा.

निलंबित इंस्पेक्टर से पूछताछ

आपको बता दें कि इस मामले में सप्लाई के साथ साथ ड्रग इंस्पेक्टरों और अन्य अधिकारियों से भी पूछताछ हो सकती है. सूत्रों के अनुसार, निलंबित ड्रग इंस्पेक्टर नरेश कुमार को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है. यह भी जांच का विषय है कि जब अश्वनी कुमार के मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निलंबित होने के बाद कथित तौर पर कम समय में बहाल होने की परिस्थितियों की भी जांच की जा सकती है.