मानसा. पंजाब के मानसा में एंटी-ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा (45) की हत्या के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा है. परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. मंगलवार सुबह एक मेडिकल स्टोर संचालक द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या किए जाने की घटना ने इलाके में तनाव पैदा कर दिया है.
जानकारी के मुताबिक, झोटा को तीन गोलियां लगीं, जबकि उनके चार साथियों को भी गोली लगी है. बेटे की मौत के बाद मां की स्थिति बेहद दयनीय है. उन्होंने कहा कि उनका बेटा इसके पहले भी कई बार कहा था कि उसकी जान को खतरा है और आज जान चली गई.पिता ने भावुक होते हुए अपना दर्द बयां किया और सरकार व पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए.
परविंदर सिंह झोटा की मां के मुताबिक, परविंदर उनसे कहता था, ‘मां, ये मुझे मार देंगे. घर से निकलने से पहले परविंदर ने उनके पैर छुए थे और कहा था, ‘मां, मेरा खाना तैयार रखना.’ मां को अंदाजा नहीं था कि बेटे के साथ उनकी यह मुलाकात आखिरी साबित होगी. बेटे को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनसे उनका अनमोल बेटा छीन लिया गया. उन्होंने इस घटना के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि सब कुछ बर्बाद हो गया है.
पिता भीमसेन बोले- ‘न मेरा बेटा बिका, न मैं बिकूंगा’
परविंदर के पिता भीमसेन ने भी बेटे की हत्या पर गहरा दुख जताया. उन्होंने कहा कि उनका बेटा पैसों के लालच में झुकने वाला व्यक्ति नहीं था. पिता ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘न मेरा बेटा बिका था और न ही मैं कभी बिकूंगा… अगर कोई यह सोचता है कि परिवार को डराकर या पैसों के दम पर दबाया जा सकता है, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है.
पुलिस प्रशासन पर उठाए सवाल
भीमसेन ने सरकार और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके बेटे ने पंजाब की युवा पीढ़ी को नशे से बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर काम किया. परविंदर बिना किसी स्वार्थ के दिन-रात नशा तस्करों के खिलाफ संघर्ष करता रहा. उनके बेटे को सुरक्षा देने के बजाय उसे माफिया के भरोसे छोड़ दिया गया. बेटे को खोने के बावजूद भीमसेन ने नशे के खिलाफ लड़ाई जारी रखने की बात कही. उन्होंने कहा कि परविंदर की शहादत बेकार नहीं जाएगी और उसके द्वारा शुरू किया गया संघर्ष अब जन आंदोलन का रूप लेगा.
आपको बता दें कि परविंदर लंबे समय से नशा के विरोध में काम करता था पंजाब में बढ़ते नशा के व्यवसाय और तस्करी को रोकने के लिए उसने कई अहम कार्य किए थे इसे करने के दौरान उसे कई बार यह महसूस भी हुआ कि उसके पीछे कई लोग पड़े हुए हैं और वह इसकी अक्सर अपने परिवार से बातें करता था लेकिन सारी चीजों को किनारे रखते हुए उसने पंजाब के युवाओं को नशा से दूर रखने के लिए इस मुहिम को लगातार छेड़ रहा. उनकी मौत से इलाके में ग़म का माहौल बना हुआ है.
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