अमृतसर : खनौरी और शंभू बॉर्डर पर अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के गैर राजनीतिक संगठनों द्वारा सोमवार 30 दिसंबर को पंजाब बंद करने की कॉल दी गई है। इस कॉल को मिनीबस ऑपरेटर पंजाब ने भी समर्थन देने का ऐलान किया है।
आज मिनीबस ऑपरेटर्स एसोसिएशन पंजाब के अध्यक्ष बलदेव सिंह बब्बू और जिला अध्यक्ष सविंदर सिंह सैंसारा ने कहा कि किसानों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे संगठनों ने 30 दिसंबर को पंजाब बंद करने का जो फैसला लिया गया है जिसे वे पूरा समर्थन करेंगे क्योंकि दिन ब दिन कर्ज के बोझ तले आ रहे किसानों को बचाना बहुत जरूरी है।
अध्यक्ष बब्बू और सैंसरा ने कहा कि किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल किसानों की मांगों को पूरा करने के लिए पिछले कई दिनों से अनशन कर रहे हैं, लेकिन केंद्र सरकार पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि 30 दिसंबर को अमृतसर जिले में कोई भी बस नहीं चलेगी और इस दिन आम लोगों को भी अपने कारोबार बंद रखकर किसान संगठनों का समर्थन करना चाहिए।
फिलहाल सरबजीत सिंह तरसिक्का, हरजीत सिंह झबाल, साधु सिंह धर्मीफोजी, सुखबीर सिंह सोहल, कुलदीप सिंह झंझोटी, जरनैल सिंह जज मजीठा, गुरदेव सिंह कोहाला, निशान सिंह साबा चौहान, सोनू ढिल्लों, सतनाम सिंह सेखों, हीरा सिंह बल्ल, हरपिंदर पाल सिंह गगोमाहल, कुलवंत सिंह ढिल्लों, सतिंदर सिंह सचदेवा और कई अन्य ऑपरेटर मौजूद थे। एकजुटता दिखाते हुए उन्होंने 30 दिसंबर को बसों का चक्का पूरी तरह से जाम रखने की घोषणा की।

- ‘मैं बहुत शरारती था, केमिस्ट्री टीचर बहुत पसंद थीं’, राहुल ने बच्चों से साझा की स्कूल की यादें, बोले- शिक्षा महंगी नहीं होना चाहिए
- रायपुर प्रेस क्लब चुनाव के परिणाम घोषित, मोहन तिवारी बने अध्यक्ष, दिलीप साहू उपाध्यक्ष और गौरव शर्मा महासचिव निर्वाचित
- Bihar Top News Today: नीतीश कैबिनेट मीटिंग में 43 प्रस्तावों पर लगी मुहर, खरमास बाद NDA में शामिल होंगे तेज प्रताप यादव! गिरिराज सिंह ने पप्पू यादव को बताया कर्महीन, चिराग ने तेजस्वी को दी खास सलाह, पूर्णिया गैंगरेप केस में आया नया मोड़, BPSC शिक्षिका ने लगाया मौत को गले, पिता की प्रेमिका ने बेटे को उतारा मौत के घाट, सभी खबरें पढ़ें एक क्लिक पर…
- केंद्रापड़ा : घर बनाने को लेकर पुरानी दुश्मनी में मां-बेटे पर एसिड अटैक, हालत गंभीर
- Rajasthan Politics: सरकार के भर्ती कैलेंडर पर डोटासरा का हमला, बोले- शिक्षकों की अनदेखी, अपने फायदे की भर्तियां

