पटना। बिहार और आसपास के राज्यों के लकवा (पैरालिसिस) मरीजों को अब इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। पटना एम्स में जल्द ही एक समर्पित स्ट्रोक सेंटर स्थापित किया जाएगा। एम्स प्रशासन द्वारा भेजे गए प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने अपनी औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले से पूरे पूर्वी भारत के मरीजों को एक ही छत के नीचे आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं मिल सकेंगी।
गोल्डन आवर में मिलेगा विशेषज्ञ इलाज
एम्स पटना के निदेशक ब्रिगेडियर डॉ. राजू अग्रवाल के अनुसार, ब्रेन स्ट्रोक के मामलों में सही समय (‘गोल्डन आवर’) पर इलाज मिलना सबसे महत्वपूर्ण होता है। समय पर मिला इलाज न सिर्फ मरीज की जान बचाता है, बल्कि उसे उम्रभर की अपंगता से भी सुरक्षित रखता है। नए सेंटर में न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरोसर्जन और क्रिटिकल केयर विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम हर वक्त तैनात रहेगी।
तुरंत जांच, आईसीयू और फिजियोथेरेपी की एकीकृत सुविधा
इस केंद्र में मस्तिष्क की नसों में ब्लॉकेज या ब्लीडिंग का पता लगाने के लिए त्वरित डायग्नोस्टिक जांचें और आपातकालीन सर्जिकल इंटरवेंशन की व्यवस्था होगी। गंभीर मरीजों के लिए आधुनिक आईसीयू और लाइफ सपोर्ट सिस्टम रहेगा। इसके अलावा, लकवे के प्रभाव को कम कर मरीज के शरीर को दोबारा सक्रिय बनाने के लिए विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट की टीम काम करेगी।

