पटना। सिविल कोर्ट की महिला अधिवक्ता इंदिरा लक्ष्मी की संदिग्ध मौत ने कानूनी गलियारे में आक्रोश पैदा कर दिया है। इस घटना के विरोध में वकीलों ने काम ठप कर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पटना के राजेंद्र नगर (रोड नंबर 2) में बुधवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। अधिवक्ता इंदिरा लक्ष्मी की बॉडी उनके जी+1 पुरानी बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर स्थित बरामदे में जली हुई अवस्था में पाई गई। घटना के वक्त घर में कोई और सदस्य मौजूद नहीं था। पुलिस की शुरुआती पूछताछ में केयरटेकर ने बताया कि अधिवक्ता देर रात तक बरामदे में बैठी थीं, लेकिन सुबह उनकी लाश बरामद हुई। चौंकाने वाली बात यह है कि परिसर का लोहे वाला मुख्य गेट अंदर से बंद था।
वकीलों का फूटा गुस्सा
इस रहस्यमयी मौत के बाद पटना सिविल कोर्ट के अधिवक्ताओं में भारी नाराजगी है। डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन (DBA) ने एक आपात बैठक बुलाई, जिसमें सर्वसम्मति से कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया गया। एसोसिएशन के सचिव अरविंद कुमार मउआर ने कहा कि हमारी साथी की मौत सामान्य नहीं है। न्याय की मांग को लेकर सुबह 10:30 बजे से ही काम ठप कर दिया गया है। वकीलों ने पटना हाईकोर्ट और SSP से इस मामले की न्यायिक और उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की है।
परिजनों का बयान और पुलिस की जांच
मृतका के पति, जो रांची में थे, सूचना मिलते ही पटना पहुंचे। उन्होंने बताया कि इंदिरा 1 फरवरी को ही रांची से लौटी थीं और सब कुछ सामान्य था। उनकी बेटी दिल्ली में रहती है, जिसके आने के बाद ही परिवार आगे की स्थिति स्पष्ट कर पाएगा। वर्तमान में पुलिस रेंटर्स और केयरटेकर से पूछताछ कर रही है ताकि यह साफ हो सके कि यह आत्महत्या है या कोई सोची-समझी साजिश।
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