पटना। बिहार की राजधानी पटना में 1 अप्रैल से कमर्शियल प्रॉपर्टी मालिकों को बड़ा आर्थिक झटका लगने जा रहा है। पटना नगर निगम ने गैर-आवासीय संपत्तियों के टैक्स में भारी बढ़ोतरी का फैसला किया है। करीब 33 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद निगम ने टैक्स की दरों को रिवाइज किया है, जिससे शहर के होटल, मॉल, निजी अस्पताल और कोचिंग संस्थानों पर वित्तीय बोझ बढ़ना तय है।
33 साल बाद टैक्स स्लैब में ऐतिहासिक बदलाव
पटना नगर निगम क्षेत्र में आखिरी बार 1993 में गैर-आवासीय संपत्ति कर की दरों में संशोधन किया गया था। अब बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की नई अधिसूचना के तहत, निगम ने संपत्तियों के उपयोग और वहां होने वाली व्यावसायिक गतिविधियों के आधार पर नया टैक्स स्ट्रक्चर तैयार किया है। निगम का तर्क है कि जहां व्यावसायिक गतिविधियां अधिक हैं, वहां से ज्यादा राजस्व जुटाना विकास कार्यों के लिए तर्कसंगत है।
इन पर पड़ेगा दोगुनी मार
नई व्यवस्था के तहत सबसे ज्यादा असर उन संस्थानों पर पड़ेगा जिन्हें कर गुणांक 2 की श्रेणी में रखा गया है। कल से इन संपत्तियों पर टैक्स सीधा दोगुना हो जाएगा:
- होटल, जिम, क्लब और हेल्थ क्लब।
- निजी अस्पताल, बैंक और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस।
- विवाह हॉल, वर्कशॉप और मध्यम श्रेणी के गोदाम (3000 वर्गफीट तक)।
- कुटीर उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी भारी उद्योग।
डेढ़ गुना बढ़ेगा इनका टैक्स
शिक्षा और मध्यम व्यापार से जुड़ी संपत्तियों के लिए टैक्स की दर 1.5 गुना बढ़ाई गई है। इस दायरे में निम्नलिखित शामिल हैं:
- कोचिंग संस्थान, निजी स्कूल, कॉलेज और रिसर्च सेंटर।
- नर्सिंग होम, डायग्नोस्टिक सेंटर और क्लिनिक।
- शॉपिंग मॉल, शोरूम, मल्टीप्लेक्स और रेस्टोरेंट।
- 3000 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल वाली बड़ी दुकानें और गेस्ट हाउस।
किसे मिली राहत और किसे छूट?
नगर निगम ने छोटे व्यापारियों और सरकारी दफ्तरों को इस बढ़ोतरी से दूर रखा है। 500 वर्गफीट से कम की दुकानें, 1000 वर्गफीट से छोटे गोदाम और कुटीर उद्योगों के टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है। साथ ही, केंद्र और राज्य सरकार के वे कार्यालय जो विशुद्ध रूप से प्रशासनिक हैं (व्यावसायिक नहीं), पुराने रेट पर ही टैक्स देंगे। वहीं, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को पूरी तरह टैक्स फ्री रखा गया है।
विपक्ष और पार्षदों ने बताया तुगलकी फरमान
निगम के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। पूर्व डिप्टी मेयर और वार्ड पार्षद विनय कुमार पप्पू ने इसे तुगलकी फरमान और व्यापारी विरोधी करार दिया है। उनका कहना है कि व्यापार के आधार पर प्रॉपर्टी टैक्स वसूलना देश में अपनी तरह का पहला और गलत उदाहरण है। उन्होंने इसे मध्यम वर्ग और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ने वाली सुनियोजित लूट की साजिश बताया है।
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