पटना। बिहार की राजधानी में निजी स्कूलों द्वारा शिक्षा के नाम पर की जा रही फीस लूट के खिलाफ जिला प्रशासन ने मोर्चा खोल दिया है। अभिभावकों के बढ़ते आक्रोश और लगातार मिल रही शिकायतों को देखते हुए पटना के जिलाधिकारी (डीएम) डॉ. त्यागराजन एस.एम. ने एक ऐतिहासिक और सख्त आदेश जारी किया है। इस निर्देश के बाद अब कोई भी निजी स्कूल बिना पूर्व अनुमति के फीस में बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा और न ही नियमों का उल्लंघन कर अतिरिक्त शुल्क वसूल पाएगा।
शिकायतों का अंबार और प्रशासन की सक्रियता
पिछले काफी समय से पटना के विभिन्न क्षेत्रों से अभिभावक यह शिकायत कर रहे थे कि नामी निजी स्कूल प्रवेश शुल्क, ट्यूशन फीस और विकास शुल्क के अलावा भी ‘सालाना शुल्क’ और ‘विविध शुल्क’ के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। कई स्कूलों में फीस संरचना को लेकर कोई स्पष्टता नहीं थी, जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा था। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल जांच के आदेश दिए हैं।
डीएम के सख्त निर्देश और जवाबदेही
जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) और सभी अनुमंडल पदाधिकारियों (SDO) को विशेष निगरानी का जिम्मा सौंपा है। डॉ. त्यागराजन ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार द्वारा निर्धारित ‘शुल्क विनियमन अधिनियम’ का पालन करना हर स्कूल के लिए अनिवार्य है। यदि कोई स्कूल मनमाने ढंग से फीस बढ़ाता है या बिना रसीद के पैसे लेता है, तो उसे नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाएगा।
पारदर्शिता के लिए नए नियम
प्रशासन ने स्कूलों के लिए पारदर्शिता के मानक तय कर दिए हैं:
- सार्वजनिक जानकारी: प्रत्येक स्कूल को अपनी पूरी फीस संरचना स्कूल के नोटिस बोर्ड और आधिकारिक वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से प्रदर्शित करनी होगी।
- अनुमति अनिवार्य: फीस में किसी भी प्रकार की वृद्धि से पहले संबंधित विभाग और समिति से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
- अतिरिक्त शुल्क पर रोक: ट्यूशन फीस के अलावा अन्य मदों में ली जाने वाली राशि का ठोस आधार बताना होगा।
कार्रवाई का स्वरूप और दंड
डीएम ने चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों पर केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि उनकी मान्यता रद्द करने जैसी प्रशासनिक कार्रवाई भी की जा सकती है। इसके लिए एक शुल्क विनियमन समिति को सक्रिय कर दिया गया है, जो प्राप्त शिकायतों की त्वरित जांच कर कानूनी कदम उठाएगी।
अभिभावकों को बड़ी राहत
जिलाधिकारी के इस कदम से पटना के हजारों अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। डॉ. त्यागराजन ने स्पष्ट शब्दों में कहा, छात्रों के भविष्य और अभिभावकों की जेब के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शिक्षा एक सेवा है, इसे अवैध वसूली का जरिया नहीं बनने दिया जाएगा।
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